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अगर घर में पाल रहे हैं कुत्ते-बिल्ली, तो फौरन कराएं पंजीकरण, नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई

24 नव. 2025

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अमित कुमार

कोडरमा ( KODERMA) :  राज्य के शहरी क्षेत्र में रहने वाले पशु प्रेमियों को अब अपने पालतू कुत्ते और बिल्ली का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. सुप्रीम कोर्ट के स्वत संज्ञान मामले में दिए गए आदेश के बाद शहरी निकायों ने आम सूचना जारी कर लोगों को दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है. इधर झुमरी तिलैया नगर परिषद के सीटी मैनेजर ने बताया कि शीर्घ ही इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया की जायेगी. किसी एंजेसी को इसके लिए अधिकृत किया जायेगा. शहर में दो फिडिंग जोन खाना खिलाने के लिए मडुआटांड और ब्लॉक मैदान में किया जायेगा. इधर रॉची के चिकित्सक डॉ अवधेश सेठ ने बताया कि स्नेहा एनीमिल सोसाईटी के द्वारा रॉची में 2007 से ही कुत्तों के प्रति कार्य किया जा रहा है और अभी तक 7 लाख सर्जरी की जा चुकी है. दूरभाष पर बताया कि किसी शहर में 1 लाख आबादी में लगभग 7 प्रतिशत कुत्तों की संख्या होती है. उसमें झुमरी तिलैया शहर में लगभग 5 प्रतिशत डॉग है आने वाले दिनों में झुमरी तिलैया में भी डॉग के प्रति जागरूकता कार्यक्रम के साथ -साथ 7 दिनों के लिए कुत्तों को हॉस्पीटल में रखने की प्रक्रिया की जायेगी. इसके दौरान फिमेल का 7 दिन और मेल का 5 दिन में बंध्याकरण ऑपरेशन किया जायेगा.

पालतू कुत्ते और बिल्ली का पंजीकरण कराना जरूरी

 झारखंड के शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अब अपने पालतू कुत्ते और बिल्ली का पंजीकरण कराना जरूरी होगा. सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान मामले में दिए गए आदेश के बाद शहरी निकायों ने आम सूचना जारी कर लोगों को दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है. इन पशुओं को पालने वालों को नगर निकायों में जाकर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. नगर विकास विभाग के निर्देश के बाद झुमरी तिलैया नगर परिषद ने लोगों के लिए आम सूचना जारी करने जुट गया है. राज्य की अन्य निकायों में भी सूचना जारी करने की तैयारी पूरी कर ली गई है.

 पंजीकरण नहीं कराने पर झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 के तहत कार्रवाई

नगर निकायों ने निर्देश दिया है कि जो लोग पंजीकरण नहीं कराएंगे, उन पर झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 के तहत कार्रवाई की जाएगी. आम नागरिकों के लिए पंजीकरण शुल्क 100 रुपए एवं व्यवसायिक व प्रजनन के लिए 1000 रुपए निर्धारित है. पंजीकरण कराने के समय मालिकों को अपना पहचान पत्र, टीकाकरण प्रमाण पत्र, जीव का फोटो लाना होगा.

 शीर्ष कोर्ट दे चुका है आदेश

 बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने देश में बढ़ रही आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों और बड़ों को काटे जाने की घटनाओं में वृद्धि को खतरनाक बताया है. उच्चतम न्यायालय ने इस पर अपनी चिंता जताते हुए राज्यों को आदेश दिया है कि सभी संस्थागत स्थलों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए. अदालत ने आदेश दिया है कि सभी राज्यों के मुख्य सचिव न्यायालय को अनुपालन की रिपोर्ट देंगे. बहरहाल सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान से अबतक पालतू कुत्ते और बिल्लियों के हमले में हुए घायल लोगों को काफी संतुष्टि मिली है, वहीं पालतू पशु रखने वालों को रहना होगा चौकन्ना.

24 नव. 2025

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