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कोल्हान विवि के 7वें दीक्षांत समारोह का राज्यपाल ने किया उद्घाटन, स्वर्ण पदक में छात्राओं की चमक बरकरार

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
13 घंटे पहले
2 मिनट पठन

चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय के सभागार में मंगलवार को 7वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का उद्घाटन झारखंड के राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने किया। विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने पुष्पगुच्छ देकर राज्यपाल का स्वागत किया। समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 224 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। स्वर्ण पदक हासिल करने वालों में छात्राओं का दबदबा रहा।



इनमें 39 पीएचडी, 132 स्नातकोत्तर (पीजी), 17 पीजी मेडिकल डिप्लोमा और 10 एमएड की उपाधियां शामिल हैं। समारोह की खास बात यह रही कि स्वर्ण पदक हासिल करने वालों में छात्राओं का दबदबा बरकरार रहा। कुल 26 स्वर्ण पदक विजेताओं में 15 छात्राएं और 11 छात्र शामिल हैं।


विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि लेने का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का संकल्प लेने का भी अवसर है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी।



राज्यपाल ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय की अपनी अलग पहचान है और जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। आधुनिक शिक्षा के साथ जनजातीय भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने महिला शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि एक बेटी की शिक्षा पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ी को नई दिशा देती है। छात्रावास, छात्रवृत्ति और बेहतर शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने की आवश्यकता है।


उन्होंने कहा कि कोल्हान की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जनजातीय समाज, कृषि, पर्यावरण, स्वास्थ्य, स्थानीय अर्थव्यवस्था और संस्कृति से जुड़े विषयों पर शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय के शोध का लाभ समाज तक पहुंचना चाहिए।



राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों का समय और भविष्य विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है। सभी शैक्षणिक सत्र नियमित और परीक्षाएं समय पर हों, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी के बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने के साथ विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशने चाहिए।



उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प में युवाओं के ज्ञान, कौशल, नवाचार और जिम्मेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सफलता केवल अच्छी नौकरी पाने में नहीं, बल्कि शिक्षा को समाज के लिए उपयोगी बनाने में है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी जड़ों और कोल्हान की पहचान से जुड़े रहते हुए झारखंड तथा देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

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