बच्चों को नशे और गलत संगत से बचाने की पहल, बिरसानगर में ग्रामीणों ने बनाई सामाजिक निगरानी की रणनीति
- Rahul
- 12 घंटे पहले
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चाईबासा: बच्चों को नशे की गिरफ्त और गलत संगत से बचाने के लिए अब गांव स्तर पर भी आवाज बुलंद होने लगी है। बिरसानगर टू स्थित चौराहे पर ग्रामीणों ने विशेष बैठक कर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने और उन्हें शिक्षा से जोड़ने पर मंथन किया।
बैठक की अध्यक्षता ठाकुरा गांव के मुंडा बुधराम चाम्पिया, समाजसेवी प्रशांत चाम्पिया और बबलू चाम्पिया ने संयुक्त रूप से की। वक्ताओं ने कहा कि कम उम्र में गलत संगत और नशे की शुरुआत बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर सकती है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों और उनके साथ उठने-बैठने वालों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
बैठक में साफ संदेश दिया गया—बच्चों का भविष्य बचाना है तो उन्हें स्कूल से जोड़ना होगा और नशे से दूर रखना होगा। ग्रामीणों ने अभिभावकों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और उनके साथ संवाद बनाए रखने की अपील की।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए घर का माहौल भी नशामुक्त होना जरूरी है। अभिभावक खुद उदाहरण पेश करेंगे, तभी बच्चों पर उसका सकारात्मक असर पड़ेगा।
बैठक में नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाने की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई गई। ग्रामीणों ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी तत्काल परिजनों और प्रशासन को देने की बात कही। सामाजिक स्तर पर निगरानी मजबूत करने और ऐसी घटनाओं पर सामुदायिक स्तर पर कार्रवाई की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।
बैठक में राजेश चाम्पिया, ऋषि नायक, काटें साहू, मुरली नायक, अशोक महतो, राकेश रोशन चाम्पिया, बीजू चाम्पिया, श्याम चाम्पिया, गोपाल चाम्पिया, मंगल चाम्पिया, चंद्रमोहन केराई, गोनू चाम्पिया, प्रदान चाम्पिया, जयराम चाम्पिया, बाटू चाम्पिया, डोंनका हाईबुरु समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
बैठक के अंत में ग्रामीणों ने सामूहिक संकल्प लिया कि बच्चों को नशे और गलत संगत से दूर रखकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गांव स्तर पर लगातार जागरूकता और निगरानी अभियान चलाया जाएगा।





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