विशाखापत्तनम में पश्चिम ओडिया समाज ने मनाया नुआखाई भेंटघाट

विशाखापत्तनम: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रह रहे पश्चिम ओडिशा के लोगों ने अपनी भाषा, कला, संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखते हुए नुआखाई भेंटघाट समारोह का आयोजन किया। पश्चिम ओडिशा के प्रवासी समाज के संगठन जुहार परिवार की ओर से मेघादिरीपेटा स्थित कलामेघा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत मां समलेश्वरी की पूजा-अर्चना के साथ हुई। मां समलेश्वरी को नए चूड़े का प्रसाद अर्पित कर समाज की सुख-समृद्धि की कामना की गई। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को नुआखाई की शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक तरीके से पर्व की खुशियां साझा कीं।
समारोह में संबलपुरी गीत-संगीत और लोकनृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। सुंदरगढ़, संबलपुर, बलांगीर, बरगढ़ सहित पश्चिम ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कलाकारों और नृत्य मंडलियों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। गायक शाश्वत कुमार त्रिपाठी ने मां समलेश्वरी के भजन से सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत की।
इसके बाद ईश्वरी बेहरा, संगीता सारंगी (रोजी), एजे राजा, ए. महापात्र, उत्तम चरण सहित अन्य कलाकारों ने भक्ति गीत, संबलपुरी गीत और लोक संगीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में संबलपुर के प्रसिद्ध कंस मेला की झांकी भी प्रस्तुत की गई, जो लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। झांकी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों तथा नई पीढ़ी को पश्चिम ओडिशा की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया गया।

इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कलाकारों, नृत्य मंडलियों, पारंपरिक वाद्य यंत्र कलाकारों और गणमान्य अतिथियों को सम्मानित किया गया। जुहार परिवार के अध्यक्ष मनोज बेहरा ने कहा कि नुआखाई भेंटघाट का मुख्य उद्देश्य प्रवासी पश्चिम ओडिया समाज को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखना है। रोजगार और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में रह रहे हैं। ऐसे में अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नुआखाई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, भाषा और सामाजिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी है। समारोह में जुहार परिवार के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ शंकर पटनायक, सुगरीबर भोई, सचिव निर्मल चंद्र नायक, आदित्य महापात्र, सुशील तांडी, प्रेमानंद दास, चितरंजन पंडा, कुमुद बाघ, मनोज कुमार राणा, संतो कुमार साहू, फकीर नाग, सुब्रत कुमार भोई, लिंगराज पांडे, महेंद्र लुहा, प्रकाश साहू, सुकांत महार, सुशांत पति समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।





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