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कमीशनखोरी के लिए बदनाम जिले का हाल, पश्चिमी सिंहभूम में खोखले स्कूल भवनों को सजाने में खर्च होंगे 41 करोड़ (EXCLUSIVE REPORT)

  • लेखक की तस्वीर: Tarique Anwar
    Tarique Anwar
  • 3 दिस॰ 2024
  • 3 मिनट पठन
  • भवनों की मरम्मत के बजाय स्कूलों को मॉडल बनाने के लिए सामग्री आपूर्ति पर खर्च किए जा रहे 41 करोड़

  • जिले के 890 विद्यालयों में डीएमएफटी फंड से की जाएगी आठ प्रकार की सामग्रियों की आपूर्ति

  • भवनों की जर्जर अवस्था पर विभाग और सरकारी अमले का ध्यान नहीं


पश्चिम सिंहभूम जिले में जर्जर स्कूल भवन
पश्चिम सिंहभूम जिले में जर्जर स्कूल भवन

तारिक अनवर। गोइलकेरा

पश्चिमी सिंहभूम जिले के कमोबेश सभी प्रखंडों में जर्जर स्कूल भवनों के कारण विभाग और सरकारी तंत्र की फजीहत होती है। कई स्कूलों में बुनियादी ढांचे का अब भी घोर अभाव है। बरसात में टपकते छत और टूटते फर्श इसकी बानगी बयां करते हैं। लेकिन हैरत की बात यह कि जिले के खोखले होते स्कूल भवनों की दशा सुधारने के बजाय सरकारी अमला स्कूलों को सजाने के नाम पर 41 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की निधि से जिले के सभी 18 प्रखंडों के चयनित किए गए 890 सरकारी स्कूलों को मॉडल बनाने के लिए कुल 40 करोड़ 81 लाख 65 हजार 570 रुपये खर्च किए जा रहे हैं।


पश्चिम सिंहभूम जिले में जर्जर स्कूल भवन
पश्चिम सिंहभूम जिले में जर्जर स्कूल भवन

इसके तहत सरकारी स्कूलों में आठ प्रकार की सामग्रियों की आपूर्ति का टेंडर दमन एवं दीव की कंपनी गिलोन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है। इस कंपनी के द्वारा प्रत्येक स्कूलों में दो टीचर टेबल, दो टीचर चेयर, एक फर्स्ट एड किट, दो डस्टबीन, दो ग्रीन बोर्ड, एक हजार स्क्वायर फ़ीट में थ्री-डी पेंटिंग, स्पोर्ट्स किट और 20 लर्निंग बेंच की सप्लाई की जाएगी।



इन सामानों के बदले एक स्कूल में चार लाख 58 हजार 613 रुपये खर्च होंगे। सवाल यह है कि जिन स्कूलों के जर्जर कमरों में मासूम बच्चों की जान सांसत में रहती है वहां ऐसी सामग्रियों की आपूर्ति का क्या लाभ? कई स्कूलों में जर्जर भवनों की मरम्मत या नए भवनों के निर्माण का मामला वर्षों से लंबित है। कई बार पत्राचार और गुहार के बावजूद इस पर प्रशासन और सरकारी महकमे का ध्यान नहीं है।



  • गोइलकेरा में 35 स्कूलों के भवन खस्ताहाल

अकेले गोइलकेरा प्रखंड में ही 35 सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर स्थिति में हैं। विभाग के वरीय अधिकारियों से भवनों की मरम्मत और नए कमरों के निर्माण को लेकर लगातार पत्राचार किया जाता है। विगत जुलाई महीने में भी 23 स्कूलों की रिपोर्ट विभाग को भेजी गई है। जबकि 12 अन्य स्कूलों की लिस्ट तैयार है। इतना ही नहीं जिन स्कूल भवनों की हालत खस्ता है वहां भी सामग्री आपूर्ति और थ्री-डी पेंटिंग का आदेश निर्गत किया गया है। कहा जा रहा है कि डीएमएफटी में इस तरह से करोड़ों के टेंडर का मामला कमीशन से जुड़ा है। जिसके चलते प्राथमिकताओं को नजरअंदाज किया गया है।



  • रूमकुट स्कूल में पढ़ते हैं तोडांगसाई स्कूल के बच्चे

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय तोडांगसाई के भवन की हालत इतनी बदतर है कि यह कभी भी गिर सकता है। इसको देखते हुए यहां कक्षाओं का संचालन पिछले साल ही बंद कर दिया गया।था। यहां अध्ययनरत 49 बच्चे प्राथमिक विद्यालय रूमकुट में शिफ्ट कर दिए गए हैं। एक कमरे में कक्षा एक से पांच तक के सभी बच्चों को बैठाया जाता है।


  • किस प्रखंड में होगा कितना खर्च




प्रखंड - स्कूलों की संख्या - राशि


आनंदपुर -27- 1,23,82,551.00


बंदगांव -40- 1,83,44,520.00


चक्रधरपुर -101- 4,63,19,913.00


गोइलकेरा -84- 3,85,23,492.00


गुदड़ी -16- 73,37,808.00


हाटगम्हरिया -55- 2,52,23,715.00


जगन्नाथपुर -62- 2,84,34,006.00


झींकपानी -20- 91,72,260.00


खूंटपानी -36- 1,65,10,068.00


कुमारडूंगी -43- 1,97,20,359.00


मझगांव -54- 2,77,65,102.00


मंझारी -50- 2,29,30,650.00


मनोहरपुर -52- 2,38,47,876.00


नोवामुंडी -65- 2,98,09,845.00


चाईबासा- 60- 2,75,16,780.00


सोनुआ- 48- 2,20,13,424.00


तांतनगर- 39- 1,78,85,907.00


टोंटो- 38- 1,74,27,294.00

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कुल-890 स्कूल- 40,81,65,570.00

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