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दीक्षांत समारोह सिर्फ उपाधि लेने का अवसर नहीं, समाज के प्रति दायित्व निभाने का संकल्प भी: राज्यपाल

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
32 मिनट पहले
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चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष गंगवार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का संकल्प लेने का भी अवसर है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी और कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में उनके परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


राज्यपाल ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय की अपनी अलग पहचान है। जनजातीय क्षेत्र में स्थित यह विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कोल्हान क्षेत्र सांस्कृतिक और जनजातीय विविधता से समृद्ध है। ऐसे में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय परंपराओं, भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।


उन्होंने महिला शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय की एक विशेष पहचान यह भी है कि यहां छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। एक बेटी को शिक्षित करने का प्रभाव केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और आने वाली पीढ़ी भी नई दिशा प्राप्त करती है। ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों की शिक्षा को और मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए छात्रावास, छात्रवृत्ति, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विकास के अवसरों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।


राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से नवाचार और शोध की संस्कृति को मजबूत करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि कोल्हान क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जनजातीय समाज, कृषि, पर्यावरण, स्वास्थ्य, स्थानीय अर्थव्यवस्था, जनजातीय भाषाओं और संस्कृति से जुड़े विषयों पर शोध को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय का शोध तभी अधिक सार्थक होगा, जब उसका लाभ समाज और स्थानीय लोगों तक पहुंचे तथा वह समाज के उत्थान में योगदान दे।


उन्होंने कहा कि कुलाधिपति के रूप में उनका निरंतर प्रयास रहा है कि विश्वविद्यालयों में सभी शैक्षणिक सत्र नियमित रहें और परीक्षाएं समय पर आयोजित हों। विद्यार्थियों का भविष्य और उनका समय विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय के केंद्र में विद्यार्थी होना चाहिए और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान होना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के बीच विश्वास मजबूत बना रहे।



राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी जैसी नई तकनीकें विद्यार्थियों के सामने नए अवसर लेकर आ रही हैं। विद्यार्थियों को इन अवसरों के लिए स्वयं को तैयार करने के साथ-साथ अपने आसपास की समस्याओं को समझना और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना चाहिए। स्थानीय समस्याओं के समाधान की सोच विद्यार्थियों को समाज से जोड़ती है।


उन्होंने कहा कि भारत आज महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है और विकास के नए आयाम सामने आ रहे हैं। विकसित भारत-2047 के संकल्प को पूरा करने में विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।


राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता का अर्थ केवल अच्छी नौकरी प्राप्त करना नहीं है। वास्तविक सफलता तब है, जब शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व को बेहतर बनाए और उसका ज्ञान समाज के लिए उपयोगी साबित हो। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी जड़ों से जुड़े रहने तथा कोल्हान की पहचान और विश्वविद्यालय से मिली सीख को अपने साथ लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।


उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने ज्ञान और कर्म के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाएं। आने वाले वर्षों में उनके नाम के साथ उनके सामाजिक योगदान की पहचान भी जुड़नी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कोल्हान, झारखंड और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का आह्वान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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