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सारंडा में बारिश का कहर: बड़ाजामदा जलमग्न, किरीबुरु की पुलिया पर बढ़ा दबाव

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
26 अग॰
2 मिनट पठन

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बड़ाजामदा, मेघाहातुबुरु, गुवा और किरीबुरु में पहाड़ों से उतर रहा पानी अब कई इलाकों के लिए मुसीबत बन गया है। सबसे भयावह तस्वीर बड़ाजामदा से सामने आई है, जहां तेज बहाव के साथ आया पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया।


बड़ाजामदा में घर बने तालाब, 4-5 फीट तक पानी


पहाड़ी नालों में उफान आने के बाद बड़ाजामदा के कई घरों में चार से पांच फीट तक पानी भर गया। अचानक बढ़े जलस्तर के कारण लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। पानी के तेज बहाव में घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फर्नीचर और खाद्य सामग्री बर्बाद होने की बात सामने आ रही है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान पहाड़ी पानी इसी तरह बस्तियों में घुसता है, लेकिन अब तक जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर हर मानसून में तबाही के बाद ही प्रशासन क्यों जागता है?


किरीबुरु में तालाब लबालब, पुलिया पर मंडराया खतरा


उधर, किरीबुरु में लगातार बारिश से लोकेश्वर नाथ मंदिर तालाब और लेक गार्डन तालाब का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। पानी बढ़ने के कारण जाकिर हुसैन पार्क भी जलमग्न हो गया है।



सीजीएम आवास और मंदिर के बीच बनी पुलिया पर दोनों तालाबों के बढ़े जलस्तर का दबाव बढ़ गया है। इससे पुलिया को नुकसान पहुंचने की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है। हालांकि, आवागमन के लिए वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं, लेकिन लोग पुलिया की तत्काल जांच की मांग कर रहे हैं।


हर साल की परेशानी, अब स्थायी समाधान की मांग


बारिश के बाद पैदा हुई स्थिति ने एक बार फिर सारंडा क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत के साथ-साथ पुलिया की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।


लोगों का कहना है कि केवल बारिश के दौरान राहत पहुंचाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पहाड़ी पानी की निकासी के लिए वैज्ञानिक और स्थायी व्यवस्था तैयार करनी होगी, ताकि हर साल बरसात में घरों के डूबने और लाखों रुपये के नुकसान का सिलसिला रोका जा सके।

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