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72 साल की बुजुर्ग... कमर टूटी, चलना तो दूर जमीन पर रेंगकर पहुंचती हैं, फिर भी पेंशन के लिए दफ्तरों का कई महीनों से काट रही चक्कर

  • लेखक की तस्वीर: Rahul
    Rahul
  • 15 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन

चक्रधरपुर: जिस उम्र में किसी बुजुर्ग को सहारे, सम्मान और इलाज की जरूरत होती है, उस उम्र में 72 वर्षीय चुपड कुई अपने ही हक की पेंशन के लिए सिस्टम के सामने बेबस खड़ी हैं। कमर की हड्डी टूट चुकी है। पैरों पर खड़ा होना मुश्किल है। हालत ऐसी है कि उन्हें जमीन पर रेंगकर चलना पड़ता है। लेकिन सरकारी दफ्तरों की फाइलों में उनकी जिंदगी की यह तकलीफ शायद अभी भी दिखाई नहीं दे रही।


मामला चक्रधरपुर अनुमंडल के उपकोषागार से जुड़ा है। चुपड कुई के पति स्वर्गीय हरि बांदिया सेवानिवृत्त शिक्षक थे। पति की मृत्यु के बाद उन्हें पारिवारिक पेंशन मिलनी थी, लेकिन PPO बुक में नाम और जन्मतिथि गलत दर्ज होने के कारण उनकी पेंशन बंद हो गई।


परिवार ने त्रुटि सुधारने की पूरी प्रक्रिया पूरी की। महालेखाकार कार्यालय, रांची से शुद्धि-पत्र भी जारी हो चुका है। आवश्यक दस्तावेजों की छायाप्रति उपकोषागार चक्रधरपुर में जमा कर दी गई। यानी वह गलती, जिसकी वजह से पेंशन रुकी थी, उसे ठीक भी किया जा चुका है।


फिर सवाल यह है कि जब महालेखाकार कार्यालय से सुधार हो चुका है, दस्तावेज जमा हो चुके हैं, तो आखिर 72 साल की इस बुजुर्ग महिला की पेंशन अब तक क्यों अटकी है?



पेंशन उनके लिए महज सरकारी भुगतान नहीं, बल्कि जीने का सहारा है। आर्थिक तंगी के कारण वह अपनी टूटी कमर का इलाज तक नहीं करा पा रही हैं। एक तरफ शरीर जवाब दे रहा है, दूसरी तरफ सरकारी प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार कर रही है।


आखिर एक बुजुर्ग महिला को अपने हक के लिए कितनी बार दफ्तर की चौखट तक पहुंचना पड़ेगा? क्या किसी फाइल पर कार्रवाई के लिए सिस्टम को यह इंतजार करना होगा कि पीड़ित व्यक्ति की हालत और बिगड़ जाए?


अब चुपड कुई ने चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राज लक्ष्मी से गुहार लगाई है। उन्होंने उपकोषागार को PPO में आवश्यक सुधार और सत्यापन कर बैंक भेजने का निर्देश देने की मांग की है, ताकि उनकी पेंशन दोबारा शुरू हो सके और वे अपना इलाज करा सकें।


यह सिर्फ एक पेंशन की फाइल नहीं है। यह उस व्यवस्था की परीक्षा है, जो बुजुर्ग और असहाय नागरिकों के लिए बनी है। सवाल यही है—क्या सिस्टम इस 72 साल कि बेबस लाचार बुजुर्ग महिला की दर्द परेशानी दूर करेगा? उसे उसका पेंशन का अधिकार दिलाएगा?

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