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तेजस्वी के बाद बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिंहा के पास भी दो वोटर कार्ड ! राजद और कांग्रेस ने भाजपा कैसे घेरा, पढ़िए खबर में

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 10 अग॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

रांची ( RANCHI) : राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपने पास दो वोटर आईडी कार्ड के आरोप के बाद एटम बम फोड़ दिया है. तेजस्वी ने बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिंहा के दो वोटर आईडी कार्ड होने का खुलासा किया है. तेजस्वी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिंहा पर आरोप लगाते हुए कहा कि डिप्टी सीएम विजय सिंहा के पास एक वोटर कार्ड लखीसराय का है,तो दूसरी बांकीपुर का है. उनके पास दो ईपीआईसी नंबर है. दोनों अलग-अलग जिलों के दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र के हैं. उनका नाम दोनों जगह मतदाता सूची में दर्ज है.


तेजस्वी का आरोप – यह धोखाघड़ी और उम्र घोटाला  

हैरानी की बात यह है कि यह बिहार निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद हुआ है. इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, सिन्हा को या निर्वाचन आयोग को? सिन्हा के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है? इस खुलासे के बाद वह (सिन्हा) अपने पद से कब इस्तीफा देंगे?'' बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि लखीसराय विधानसभा क्षेत्र में सिन्हा का ईपीआईसी आईडी नंबर आईएएफ3939337 है और पटना जिले के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उनका आईडी नंबर एएफएस0853341 है. उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सिन्हा की उम्र एक सूची में 57 साल और दूसरी में 60 साल है. क्या यह धोखाधड़ी और उम्र घोटाला नहीं है? उन्होंने दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दो अलग-अलग फॉर्म भरे होंगे. उन्होंने जानबूझकर दो अलग-अलग जगहों पर दो वोट दर्ज करवाए.

कांग्रेस ने कसा तंज - साहब दो-दो जगह के हैं मतदाता

कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए लिखा, सबसे बड़े फ्रॉड तो उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा निकले ! साहब दो जगह के मतदाता हैं - लखीसराय और बांकीपुर, पटना। साहब ने दोनों जगह SIR फॉर्म भी भरा है। दोनों जगह ड्राफ्ट में उनका नाम भी आ गया है।महत्पूर्ण सवाल है कि यह कैसे हुआ? क्या वे पिछले चुनावों में दोनों जगह वोट दे रहे थे? तो क्या चुनाव आयोग ने उन्हें दो मताधिकार दिए हैं? नियम के खिलाफ जाकर दो जगह से SIR फॉर्म क्यों भरा? चुनाव आयोग ने दो जगह से नाम कैसे ड्राफ्ट में डाल दिया? कब होगी इस फ्रॉड पर FIR, कब होगा इस्तीफ़ा? क्या चुनाव आयोग के नियम सिर्फ दलितों, पिछड़ों, गरीबों, मजदूरों के लिए हैं, भाजपाइयों के लिए नहीं?

 

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