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BREAKING : पुत्र धर्म के साथ राजधर्म भी निभा रहे सीएम हेमंत सोरेन, पीड़ा में भी निपटा रहे सरकारी संचिक,अधिकारियों दे रहे निर्देश   

8 अग. 2025

2 मिनट का लेख

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उपेंद्र गुप्ता

 

रांची ( RANCHI ) : सीएम हेमंत सोरेन अपने पिता दिशोम गुरू शिबू सोरेन के निधन से काफी मर्माहत है और असहनीय पीड़ा में है, पुत्र के नाते अपने पिता के सभी कर्मों को वे खुद निभा रहे है, इस असहनीय दुख और पीडा की घड़ी में भी सीएम को राज्य की चिंता सता रही है. एक तरफ अपने दिवंगत पिता के सभी पारिवारिक रस्मों और रिवाजों को निभा रहे हैं, दूसरी तरफ थोड़ी सी फुर्सत मिलते ही अधिकारियों के साथ फाइलें निपटाने में जुट जाते हैं. अपने नेमरा के पैतृक आवास में ही शासन का सारा काम-काज देख रहे हैं और अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन भी कर रहे हैं, ताकि राज्य के विकास का कोई कार्य नहीं रूके.  


व्यक्तिगत भावना व दुख-दर्द त्याग कर सरकारी काम निपटा रहे सीएम

मुख्यमंत्री शोक की इस घड़ी में भी राज्यहित से जुड़े विषयों को लेकर पूरी तरह  संवेदनशील हैं. व्यक्तिगत भावनाओं और दुःख -दर्द को सीने में दबाकर वे सरकारी कामकाज को बेहतर तरीके से निभाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं. जरूरी संचिकाओं का निष्पादन करने के साथ सभी वरीय पदाधिकारियों के साथ नियमित संवाद बनाए हुए हैं. सरकार की  गतिविधियों की निरंतर जानकारी लेने के साथ-साथ उन्हें  निर्देशित कर रहे हैं. ताकि वे अपने कार्यों में तत्परता व निरंतरता बनाए रखें और इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आमजनों की समस्याओं का तत्काल निराकरण हो. कहीं भी, किसी भी कार्य में कोताही नहीं होनी चाहिए. उन्होंने वरीय पदाधिकारियों से यह भी कहा कि वे उन्हें हर पल अद्यतन सूचनाओं से अवगत कराते रहें तथा आवश्यकतानुसार  निर्देश प्राप्त करें.

बाबा को दिए वचन और वादों को  निभा रहा हूँ

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के निधन के बाद दुःख और मुसीबत की घड़ी में जिस तरह राज्य की जनता मेरे पूरे परिवार के साथ खड़ी रही, उसी से मुझे यह हिम्मत मिली कि मैं इन कठिन परिस्थितियों में भी इस राज्य के प्रति अपने दायित्वों को निभा सकूं. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा हमेशा कहा करते थे- सार्वजनिक जीवन में हमेशा आम जनता के लिए खड़ा रहना. वे संघर्ष की मिसाल थे. उन्होंने कभी झुकना नहीं सीखा. इस राज्य के लिए हमेशा लड़ते रहे. उन्होंने कभी भी अपने व्यक्तिगत हितों को तरजीह नहीं दी. संसद से सड़क तक इस राज्य के लिए संघर्ष करते रहे. आज झारखंड है, तो यह दिशोम गुरु की देन है. लेकिन, अब उनका साया हमारे ऊपर से उठ चुका है. पर, वे हम सभी के लिए पथ प्रदर्शक और मार्गदर्शक रहेंगे. उन्होंने इस राज्य की खातिर मुझसे कई वचन  लिए थे. मैं उनसे किए वादों  को  पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रहा हूं.

 

 

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