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JSSC की बड़ी लापरवाही! परीक्षा शुरू होने के बाद भेजा एडमिट कार्ड, बेरोजगार अभ्यर्थी से छिना नौकरी का मौका?

  • लेखक की तस्वीर: Rahul
    Rahul
  • 9 घंटे पहले
  • 3 मिनट पठन

चक्रधरपुर: झारखंड में सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं की लंबी प्रतीक्षा के बीच झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आयोग पर एक ऐसी लापरवाही का आरोप लगा है, जिसने एक अभ्यर्थी का वर्षों का इंतजार और मेहनत पल भर में बेकार कर दिया। मामला पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड के हथिया पंचायत अंतर्गत रामडा गांव निवासी राजेश लोहार का है।


राजेश लोहार ने वर्ष 2024 में JSSC द्वारा निकाली गई फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन किया था। 2024 में फॉर्म भरने के बाद वह करीब दो वर्षों से परीक्षा की तारीख का इंतजार कर रहा था। लेकिन जब आयोग की ओर से परीक्षा संबंधी ई-मेल मिला, तब तक काफी देर हो चुकी थी।


परीक्षा के दिन दोपहर 2:59 बजे आया मेल, शाम की परीक्षा शुरू होने वाली थी


राजेश के अनुसार, रविवार 19 जुलाई को दोपहर 2:59 बजे उसके ई-मेल पर JSSC की ओर से परीक्षा की सूचना और एडमिट कार्ड भेजा गया। हैरानी की बात यह रही कि उसी दिन परीक्षा आयोजित की जा रही थी।


एडमिट कार्ड के अनुसार परीक्षा तीन पालियों में निर्धारित थी—


पहली पाली : सुबह 8:30 बजे से 10:30 बजे तक

दूसरी पाली : 11:30 बजे से 1:30 बजे तक

तीसरी पाली : 3:30 बजे से 5:30 बजे तक


यानी जब अभ्यर्थी को एडमिट कार्ड मिला, तब दो पालियों की परीक्षा समाप्त हो चुकी थी और तीसरी पाली शुरू होने में महज कुछ मिनट बाकी थे।



सेंटर लातेहार, अभ्यर्थी जमशेदपुर में मजदूरी कर रहा था


राजेश फिलहाल रोजगार की तलाश में जमशेदपुर में मेहनत-मजदूरी कर रहा है। जबकि उसका परीक्षा केंद्र लातेहार बनाया गया था, जो जमशेदपुर से लगभग 240 किलोमीटर दूर है। इस दूरी को तय करने में सामान्यतः करीब 5 घंटे लगते हैं। ऐसे में परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले सूचना मिलने के बाद परीक्षा केंद्र पहुंचना असंभव था।



"दो साल इंतजार किया, लेकिन सरकारी लापरवाही ने मौका छीन लिया"


राजेश लोहार का कहना है कि उसने इस परीक्षा के लिए लंबे समय तक तैयारी की थी और उसे पूरा विश्वास था कि वह परीक्षा में सफल हो सकता है। यदि एडमिट कार्ड एक-दो दिन पहले भी मिल जाता, तो वह किसी भी तरह लातेहार पहुंचकर परीक्षा देता।

उसका आरोप है कि आयोग की लापरवाही के कारण उसे रोजगार पाने का एक महत्वपूर्ण अवसर गंवाना पड़ा।




सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल


यह घटना केवल एक अभ्यर्थी की परेशानी नहीं, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर यदि परीक्षा की सूचना और एडमिट कार्ड परीक्षा शुरू होने के बाद भेजे जाएं, तो अभ्यर्थी अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाएगा?


अब सवाल यह है कि—


क्या JSSC इस मामले की जांच करेगा?

परीक्षा के समय पर सूचना न मिलने की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

क्या प्रभावित अभ्यर्थी को न्याय मिलेगा या उसकी दो साल की मेहनत यूं ही व्यर्थ चली जाएगी?




झारखंड में पहले से ही सरकारी भर्तियों में देरी को लेकर युवाओं में नाराजगी है। ऐसे में यह मामला आयोग की कार्यप्रणाली पर एक और बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है। यदि राजेश लोहार के दावे सही हैं, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक बेरोजगार युवक के भविष्य पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। जहाँ एक बेरोजगार युवक से नौकरी पाने का अवसर छीन कर उसे बेरोजगार रहने पर मजबूर किया गया है।

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