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मनरेगा के अधूरे कुएं में डूबने से एक ही परिवार के दो मासूम भाई-बहन की मौत

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
2 दिन पहले
3 मिनट पठन

खेलते-खेलते पानी से भरे गड्ढे के पास पहुंची 4 वर्षीय एंजेल, बचाने के लिए कुएं में कूदा 6 वर्षीय भाई गॉडसन; दोनों की दर्दनाक मौत से गांव में पसरा मातम



आनंदपुर: सरकारी लापरवाही और व्यवस्था की अनदेखी किस तरह आम लोगों की जिंदगी को मौत के मुहाने तक पहुंचा देती है, इसका जीता-जागता उदाहरण पश्चिमी सिंहभूम के आनंदपुर में सामने आया है। जरा इन तस्वीरों को देखिए... कुछ दिन पहले तक यही मासूम बच्चे हंस रहे थे, खेल रहे थे, नाच रहे थे। उन्हें क्या पता था कि जिस गांव में उनका बचपन खिलखिला रहा है, उसी गांव में एक अधूरा सरकारी कुआं उनके लिए मौत का गड्ढा बन चुका है।


बुधवार को खेलते-खेलते चार साल की एंजेल उस पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। बहन को डूबता देख महज छह साल का भाई गॉडसन उसे बचाने के लिए कुएं में कूद गया... लेकिन दोनों मासूम फिर कभी बाहर नहीं निकल सके। आज उसी जगह जहां कल तक बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां दो मासूम भाई-बहन की लाश पड़ी थी। एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है और गांव में मातम पसरा है।



पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बाघचट्टा गांव के ऊपर टोला में बुधवार देर शाम एक दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के दो मासूम भाई-बहन की मौत हो गई। दोनों बच्चों की मौत मनरेगा योजना के तहत खोदे गए अधूरे कुएं में जमा बारिश के पानी में डूबने से हुई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है, वहीं ग्रामीणों में अधूरे कुएं को लेकर आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।


मृत बच्चों की पहचान अगस्तीन टुडू के 6 वर्षीय पुत्र गॉडसन टुडू और 4 वर्षीय पुत्री एंजेल टुडू के रूप में हुई है। दोनों मासूम भाई-बहन बताए जा रहे हैं।


खेलते-खेलते हादसे का शिकार हुए मासूम


ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार दोपहर दोनों बच्चे अपने घर के आसपास स्थित इमली के पेड़ के पास खेल रहे थे। इसी दौरान खेलते-खेलते दोनों बच्चे इमली के पेड़ से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित एक गड्ढे के पास पहुंच गए।



बताया जाता है कि यह गड्ढा मनरेगा योजना के तहत बनाए जा रहे कुएं का हिस्सा था, जो लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है। बारिश के कारण इस अधूरे कुएं में काफी पानी जमा था।


इसी दौरान खेलते समय 4 वर्षीय एंजेल टुडू का पैर फिसल गया और वह पानी से भरे अधूरे कुएं में जा गिरी। बहन को पानी में डूबता देख महज 6 साल का उसका भाई गॉडसन उसे बचाने के लिए कुएं में कूद गया।



आसपास कोई नहीं था, नहीं मिल सकी मदद


ग्रामीणों के अनुसार, घटना के समय आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। कुएं में पानी भरा होने और दोनों बच्चों की बेहद कम उम्र होने के कारण वे बाहर नहीं निकल सके। समय पर किसी की नजर नहीं पड़ने के कारण दोनों मासूमों को बचाने के लिए तत्काल मदद भी नहीं मिल सकी।


बाद में घटना की जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों बच्चों की जान जा चुकी थी। हादसे की खबर जैसे ही गांव में फैली, परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया।



आठ साल से अधूरा पड़ा है मनरेगा का कुआं, ग्रामीणों में आक्रोश


हादसे के बाद ग्रामीणों ने मनरेगा योजना के तहत बनाए जा रहे कुएं के निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कुआं पिछले करीब आठ वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। इसके बावजूद कथित तौर पर सरकारी कागजात में कुआं निर्माण कार्य को पूर्ण दिखाया गया है।


ग्रामीणों का आरोप है कि यदि कुएं का निर्माण वास्तव में अधूरा था तो उसे सुरक्षित तरीके से घेरने या वहां बच्चों और ग्रामीणों के प्रवेश को रोकने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि खुले और पानी से भरे गड्ढे के कारण ही यह दर्दनाक हादसा हुआ।



जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग


दो मासूम बच्चों की मौत के बाद ग्रामीणों में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन, कुएं के निर्माण और उसकी निगरानी को लेकर नाराजगी है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कराने तथा यह पता लगाने की मांग की है कि अधूरा कुआं वर्षों से किस स्थिति में पड़ा था और सरकारी अभिलेखों में इसे पूर्ण कैसे दर्शाया गया।


फिलहाल इस दर्दनाक घटना से अगस्तीन टुडू का परिवार गहरे सदमे में है। एक ही परिवार के दो मासूम बच्चों की एक साथ मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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