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निरीक्षण को निकले डीआरएम का स्पेशल यान ही रास्ते में हुआ खराब, टुनिया के पास डेढ़ घंटे तक दुरुस्त नहीं हो सका निरीक्षण यान

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
15 मिनट पहले
4 मिनट पठन

स्टॉपेज नहीं होने के बावजूद इस्पात एक्सप्रेस को रुकवाकर चक्रधरपुर लौटे डीआरएम



चक्रधरपुर: चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी से आम रेल यात्री आए दिन परेशान होते हैं। कई बार यात्रियों को घंटों ट्रेन में बैठकर अपने गंतव्य तक पहुंचने का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन गुरुवार को रेल परिचालन और व्यवस्था की एक अलग तस्वीर सामने आई, जब मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया जिस निरीक्षण यान से राउरकेला और बंडामुंडा के निरीक्षण पर निकले थे, वही रास्ते में तकनीकी खराबी के कारण जवाब दे गया। करीब डेढ़ घंटे तक यान को दुरुस्त करने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार डीआरएम और उनके साथ मौजूद अधिकारियों को निरीक्षण कार्यक्रम बीच में छोड़कर दूसरी ट्रेन से चक्रधरपुर लौटना पड़ा।


जानकारी के अनुसार डीआरएम तरुण हुरिया गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे अधिकारियों की टीम के साथ निरीक्षण यान से चक्रधरपुर से राउरकेला-बंडामुंडा के निरीक्षण के लिए रवाना हुए थे। करीब 12:54 बजे टुनिया स्टेशन के होम सिग्नल के पास अचानक निरीक्षण यान खराब हो गया और वहीं खड़ा हो गया। तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर यान को ठीक करने का प्रयास किया। करीब डेढ़ घंटे तक मशक्कत के बावजूद यान चालू नहीं हो सका।



स्टॉपेज नहीं, फिर भी रोकनी पड़ी इस्पात एक्सप्रेस


इसके बाद करीब ढाई बजे डाउन लाइन से इस्पात एक्सप्रेस के गुजरने की सूचना मिली। बताया गया कि टुनिया स्टेशन पर इस ट्रेन का नियमित ठहराव नहीं है। इसके बावजूद डीआरएम और अधिकारियों को वापस चक्रधरपुर लाने के लिए ट्रेन को टुनिया में रुकवाया गया। डीआरएम और उनके साथ मौजूद अधिकारी इस्पात एक्सप्रेस के बी-2 कोच में सवार होकर चक्रधरपुर लौट आए।


यहीं से आम रेल यात्रियों के लिए एक बड़ा सवाल सामने आता है। जिस स्टेशन पर किसी ट्रेन का नियमित ठहराव नहीं है, वहां एक बड़े अधिकारी की वापसी के लिए ट्रेन को रोकने की व्यवस्था हो गई। दूसरी ओर आम यात्री अपनी ट्रेन के घंटों लेट होने पर उसी ट्रेन में बैठे रहने को मजबूर होते हैं। उनके लिए न तो दूसरी ट्रेन की ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था होती है और न ही सफर को जल्दी पूरा करने का कोई विकल्प।



करीब दो घंटे तक लाइन पर खड़ा रहा निरीक्षण यान


डीआरएम के लौटने के बाद खराब निरीक्षण यान को किसी तरह होम सिग्नल क्षेत्र से खींचकर अप मेन लाइन पर लाया गया। बताया गया कि यह यान करीब दो घंटे तक लाइन पर खड़ा रहा। इसके कारण अन्य ट्रेनों के परिचालन को भी प्रभावित होने की स्थिति बनी और कुछ ट्रेनों को थर्ड लाइन से गुजारा गया। राउरकेला-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस को भी थर्ड लाइन से पार कराया गया। करीब तीन बजे निरीक्षण यान की मरम्मत कर उसे चक्रधरपुर लाया गया।



लगातार दूसरी बार राउरकेला-बंडामुंडा का निरीक्षण अधूरा


डीआरएम का राउरकेला और बंडामुंडा निरीक्षण कार्यक्रम लगातार दूसरी बार पूरा नहीं हो सका। इससे पहले भी डीआरएम तरुण हुरिया मनोहरपुर तक निरीक्षण करने के बाद समय अधिक होने के कारण आगे का दौरा स्थगित कर चक्रधरपुर लौट आए थे। इस बार राउरकेला-बंडामुंडा की ओर रवाना होने के बाद टुनिया में निरीक्षण यान खराब हो गया और कार्यक्रम बीच में ही रद्द करना पड़ा।


इतना ही नहीं, इससे पहले मेघाहातुबुरु में निरीक्षण के दौरान डीआरएम के सैलून के पटरी से उतरने की घटना भी सामने आ चुकी है। उस समय भी दुर्घटनाग्रस्त सैलून को छोड़कर उन्हें वापस लौटना पड़ा था। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच निरीक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष यान और सैलून के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।



आम यात्री के लिए पांच घंटे की देरी, अधिकारी के लिए वैकल्पिक ट्रेन?


गुरुवार की घटना ने सबसे बड़ा सवाल आम यात्री और अधिकारी की यात्रा के बीच दिखाई देने वाले अंतर को लेकर खड़ा किया है। चक्रधरपुर रेल मंडल में आम यात्रियों को कई बार ट्रेनों की लंबी देरी का सामना करना पड़ता है। यात्री टिकट का पूरा किराया चुकाने के बाद भी घंटों उसी ट्रेन में बैठकर अपनी मंजिल का इंतजार करते हैं। ट्रेन दो-तीन घंटे नहीं, बल्कि कई बार इससे भी अधिक देर से पहुंचती है और यात्री अपनी यात्रा बदलने की स्थिति में नहीं होते।


इसके विपरीत गुरुवार को निरीक्षण यान खराब होने के बाद डीआरएम और अधिकारियों के लिए तत्काल वैकल्पिक ट्रेन की व्यवस्था हो गई। जिस ट्रेन का टुनिया में नियमित ठहराव नहीं था, उसे रुकवाकर अधिकारी उसमें सवार होकर चक्रधरपुर लौट गए।



यह व्यवस्था नियमों के तहत किस प्रक्रिया से की गई और इस दौरान परिचालन पर क्या प्रभाव पड़ा, यह भी स्पष्ट किया जाना बाकी है। हालांकि घटना ने यह बहस जरूर छेड़ दी है कि जब रेल अधिकारी की यात्रा में तकनीकी समस्या आने पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था संभव है, तो आम यात्री की ट्रेन घंटों लेट होने पर उसके लिए ऐसी सुविधा क्यों नहीं होती?


गुरुवार की घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस निरीक्षण यान का इस्तेमाल मंडल की रेल व्यवस्था का जायजा लेने के लिए किया जा रहा था, वही बीच रास्ते में खराब हो गया। ऐसे में निरीक्षण यान के रखरखाव से लेकर रेल परिचालन की प्राथमिकताओं और आम यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं तक कई सवाल सामने आ गए हैं।

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