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रेलवे में ठेका प्रथा और कर्मचारियों की कमी पर गरजे शिव गोपाल मिश्रा, चक्रधरपुर में रेल यूनियन का महाधिवेशन संपन्न

  • लेखक की तस्वीर: Rahul
    Rahul
  • 11 मिनट पहले
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रेलकर्मियों को पीने का पानी तक नहीं मिलता, भारी परेशानी में काम कर रहे हैं चक्रधरपुर रेल मंडल के कर्मचारी: मिश्रा


1 जनवरी 2026 से लागु होगा आठवां वेतन आयोग: मिश्रा



चक्रधरपुर: चक्रधरपुर रेल मंडल मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी सभागार में दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस यूनियन का महाधिवेशन आयोजित किया गया। महाधिवेशन में रेलवे कर्मचारियों के अधिकार, सुरक्षा, सुविधाओं, वेतन और रेलवे में बढ़ती आउटसोर्सिंग जैसे ज्ल्वाल्न्त मुद्दे प्रमुखता से उठे। कार्यक्रम में ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन (एआईआरएफ) के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस यूनियन के महासचिव गौतम मुखर्जी, चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया, मुख्यालय से आए वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी तथा मंडल के वरीय कार्मिक अधिकारी डॉ ऋषभ सिन्हा समेत विभिन्न मंडलों से आए यूनियन के नेता और बड़ी संख्या में रेलकर्मी मौजूद रहे।


कार्यक्रम का उद्घाटन शिव गोपाल मिश्रा समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया, जबकि यूनियन के कार्यकर्ताओं ने कविता और जोशीले संबोधन के जरिए कर्मचारियों में उत्साह और संगठनात्मक एकजुटता का संदेश दिया। इससे पहले वन्दे भारत ट्रेन से चक्रधरपुर पहुंचे शिव गोपाल मिश्रा का मेंस यूनियन ने जोरदार स्वागत किया। हाथों में लाल झंडा फहराते हुए उनका स्टेशन में अभिवादन किया गया। इसके बाद उन्हें गुलदस्ता भेंट कर फुल माला से लाद दिया गया. वहीँ सड़क मार्ग पर भव्य शोभा यात्रा के साथ शिव गोपाल मिश्रा को कार्यक्रम स्थल महात्मा गांधी सभागार लाया गया। इस दौरान मेंस यूनियन के नेताओं कार्यकर्ताओं में उत्साह और जोश देखते ही बन रहा था।



20 साल का इंतजार हुआ पूरा


महाअधिवेशन को संबोधित करते हुए शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल पहुंचना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से चक्रधरपुर आने का प्रयास कर रहे थे और आखिरकार यह मौका मिला। उन्होंने कहा कि यहां के रेलकर्मियों से सीधे संवाद कर मंडल की वास्तविक स्थिति और कर्मचारियों की समस्याओं को समझने का अवसर मिला है।


ठेका प्रथा के खिलाफ जमकर बरसे शिव गोपाल


शिव गोपाल मिश्रा ने रेलवे में बढ़ती ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रेलवे के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्य लगातार ठेके और आउटसोर्सिंग के हवाले किए जा रहे हैं।


उन्होंने कहा कि रेलवे जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में संवेदनशील कार्यों को ठेकेदारों के भरोसे छोड़ना कर्मचारियों के साथ साथ रेल संचालन की सुरक्षा और काम की गुणवत्ता दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रेलवे के महत्वपूर्ण कार्य रेलवे के अपने कर्मचारियों और रेलवे संस्थान के माध्यम से ही कराए जाने चाहिए।


उन्होंने कहा कि ठेका प्रथा को खत्म करने की दिशा में संगठन लगातार आवाज उठाता रहेगा। रेलवे की सुरक्षा और गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए।



कर्मचारियों की कमी पर जताई गंभीर चिंता


एआरएएफ महासचिव ने रेलवे में लगातार घट रही कर्मचारियों की संख्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल में करीब 29 हजार कर्मचारियों की आवश्यकता के मुकाबले लगभग 24 हजार कर्मचारी ही कार्यरत हैं।


उन्होंने कहा कि एक तरफ रेलवे लगातार नई ट्रेनें चला रहा है और दूसरी तरफ कर्मचारियों की संख्या घटती जा रही है। इसका सीधा असर कम संख्या में मौजूद रेल कर्मियों पर पड़ रहा है और उनके काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है।


उन्होंने कहा कि रेलवे में खाली पड़े लाखों पदों पर जल्द से जल्द नियुक्ति होनी चाहिए। संगठन सरकार और रेलवे बोर्ड के सामने इस मुद्दे को लगातार उठाता रहा है और आगे भी नई नियुक्तियों के लिए मजबूती से आवाज उठाई जाएगी।


ट्रैकमैन की सुरक्षा और पानी की समस्या का मुद्दा उठाया


शिव गोपाल मिश्रा ने चक्रधरपुर रेल मंडल में रेलकर्मियों की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई रेलकर्मी विषम और सुदूर परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कई जगह पीने का पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।


उन्होंने ट्रैकमैन की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी की मौत सिर्फ एक कर्मचारी की मौत नहीं होती, बल्कि उसके पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। ऐसे में कर्मचारियों की सुरक्षा संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।


उन्होंने कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल की भौगोलिक और कार्य परिस्थितियां ऐसी हैं कि कई कर्मचारी यहां पदस्थापित होने के बाद जल्द से जल्द वापस जाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में मंडल को कर्मचारियों के लिए बेहतर और अनुकूल कार्यस्थल बनाने की जरूरत है।



8वें वेतन आयोग पर बोले: 1 जनवरी 2026 से होगा लागू, मिलेगा बढ़ा वेतन


महाधिवेशन में शिव गोपाल मिश्रा ने 8वें वेतन आयोग को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होगा और इसका लाभ रेलकर्मियों को मिलेगा।


उन्होंने कर्मचारियों से वेतन आयोग को लेकर किसी भी तरह की भ्रांति में नहीं पड़ने और संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने की अपील की। उन्होंने भत्तों में बढ़ोतरी की मांग को भी संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल बताया।


“रेलवे की युवा शक्ति सबसे बड़ी ताकत”


शिव गोपाल मिश्रा ने युवाओं को संगठन की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि रेलवे की युवा शक्ति मजबूत होगी तो भारतीय रेलवे भी मजबूत होगी।


उन्होंने चक्रधरपुर के कर्मचारियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि यहां संगठन की जड़ें मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि 17 वर्षों तक कार्यालय बंद रहने के बावजूद संगठन को जीवित रखने का श्रेय यहां के कार्यकर्ताओं को जाता है।


उन्होंने संगठन में सभी को साथ लेकर चलने की अपील करते हुए कहा कि संगठन को किसी के प्रति दुर्भावना नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ चुनाव में संगठन को झटका जरूर लगा, लेकिन कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा है और आने वाले चुनाव में कार्यकर्ता यूनियन का झंडा झुकने नहीं देंगे।


डीआरएम के सामने कर्मचारियों की समस्याओं का आईना


महाधिवेशन के मंच से शिव गोपाल मिश्रा ने चक्रधरपुर रेल मंडल में कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सीधे डीआरएम तरुण हुरिया के सामने कई सवाल रखे। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को कई स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।


उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेना होगा और उन्हें बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना होगा। उनका कहना था कि रेलवे कर्मचारियों के भरोसे चलती है और कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी कर रेलवे को मजबूत नहीं बनाया जा सकता।



डीआरएम तरुण हुरिया बोले: पारदर्शिता और समाधान पर जोर


चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया ने कहा कि चक्रधरपुर मंडल बेहद पुराना और महत्वपूर्ण मंडल है। यहां का कार्यक्षेत्र जटिल है, लेकिन मंडल के रेलकर्मी पूरी मेहनत और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राउरकेला, टाटानगर समेत अन्य अस्पतालों के साथ चिकित्सा सुविधाओं को लेकर कई बड़े अस्पतालों से सम्बद्ध किए गए हैं। जरूरत के समय एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।


डीआरएम ने कहा कि मंडल की विभिन्न व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। कुछ व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है और उन्हें चरणबद्ध तरीके से ठीक किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि जब कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान संबंधित स्तर पर नहीं हो पाता है, तो कर्मचारी अपनी शिकायत लेकर उनके पास आते हैं। ऐसी स्थिति में उनकी कोशिश रहती है कि समस्या को समझकर उसका समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि अब तक कई समस्याओं का समाधान किया गया है और आगे भी कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रयास जारी रहेगा।


डीआरएम ने क्वार्टर आवंटन, प्रमोशन और कर्मचारियों के सेटलमेंट ड्यूज जैसे मामलों में भी पारदर्शिता के साथ काम करने की बात कही।


महाधिवेशन कर्मचारी हित और रेलवे की सुरक्षा सर्वोपरि का सन्देश


दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस यूनियन का यह महा अधिवेशन सिर्फ संगठनात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की समस्याओं और भविष्य को लेकर गंभीर मंथन का मंच बना। एक तरफ यूनियन ने ठेका प्रथा, कर्मचारियों की कमी, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया, तो दूसरी तरफ रेल प्रशासन ने समस्याओं के समाधान और व्यवस्था में पारदर्शिता का भरोसा दिया।

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