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मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने क्यों किया हंगामा ? तीन माह में कैसे कमजोर हो गया विपक्ष, पढ़िए खास खबर   

लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
Upendra Gupta
19 जुल॰
2 मिनट पठन

न्यूज डेस्क

दिल्ली ( DELHI) :  संसद का मानसून सत्र सोमवार 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है, जो 13 अगस्त 2026 तक चलेगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को मानसून सत्र 2026 के लिए बुलाने की मंजूरी दे दी है. चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में संसद की 19 बैठकें होंगी. इस दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा की जाएगी और फैसले लिए जाएंगे. इसके पूर्व  संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले रविवार 19 जुलाई को संसद भवन एनेक्सी में सर्वदलीय बैठक जारी है, बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने बैठक का वॉकआउटकर दिया, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर से बैठक में शामिल हो गए. टीएमसी से अलग हुए 20 सांसद की नई पार्टी एनसीपीआई के गैर राजनीतिक दल होने के बावजूद उन्हें बैठक में शामिल करने के विरोध में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत पूरा विपक्ष सर्वदलीय बैठक से बाहर निकल गया.


बजट सत्र में मजबूत विपक्ष तीन माह में पड़ गया कमजोर


इसी साल फरवरी 2026 में बजट सत्र में कांग्रेस के नेतृत्व में पूरे विपक्ष ने पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी को मजबूत विपक्षी एकजूटता का एहसास कराया था. विपक्षी दलों की एकजूटता के कारण मोदी की महत्वाकांक्षी विधेयक महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिर गया. लेकिन जुलाई आते-आते विपक्ष का कुनबा पूरी तरह बिखने लगा है. विपक्ष लगातार कमजोर होता नजर आ रहा है. अप्रैल-मई में तमिलनाडू, असम, बंगाल के विधानसभा चुनाव के बाद देश में पूरी तरह राजनीतिक परिदृश्य ही बदल गया. बंगाल में ममता बनर्जी की करारी हार के बाद उनकी पार्टी टुट गई. पार्टी के 28 में से 20 सांसद टूटकर नेशनल कॉमन पीपुल्स इनिशिएटिव (NCPI) में शामिल हो गए और NDA को समर्थन दे रहे हैं. जबकि उद्धव ठाकरे के गुट के 6 सांसद एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो गए. तमिलनाडु में कांग्रेस के TVK से गठबंधन के बाद डीएमके, इंडी गठबंधन से अलग हो गया. डीएमके के 22 सांसद अब विपक्ष के साथ नहीं गिने जाएंगे. हालांकि डीएमके, एनडीए में शामिल नहीं हुआ है, लेकिन बीजेपी को उम्मीद है कि वह चुनिंदा बिलों पर इश्यू-बेस्ड समर्थन दे सकता है. वहीं शरद पवार के एनसीपी भी एनडीए के साथ देने के लिए विचार कर रही है.

 

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