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सोन नदी जल बंटवारे पर 25 साल पुराना विवाद खत्म, झारखंड-बिहार में बनी सहमति

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
31 अग॰
1 मिनट पठन

नई दिल्ली: बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई बैठक में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।


बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल समेत दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समझौते के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे झारखंड के जल हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।


सोन नदी के जल बंटवारे का मुद्दा वर्ष 2000 में झारखंड के गठन के बाद से ही लंबित था। अब दोनों राज्यों के बीच बनी सहमति के तहत अविभाजित बिहार के हिस्से में रहे 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी में बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2.00 एमएएफ पानी मिलने का प्रावधान किया गया है।



इस समझौते से झारखंड के पलामू, गढ़वा सहित सोन नदी बेसिन से जुड़े क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता मजबूत होने की उम्मीद है। वहीं बिहार के कई जिलों में भी किसानों को सिंचाई और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का लाभ मिलेगा।


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे विमर्श, तकनीकी विचार-विमर्श और आपसी प्रयासों के बाद दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी है। यह समझौता किसानों, सिंचाई व्यवस्था और झारखंड की भविष्य की जल आवश्यकताओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौते को सहकारी संघवाद और ‘टीम भारत’ की भावना का उदाहरण बताया।

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