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बड़बिल –बोलानी खदान रेलखंड के दोहरीकरण को मिली मंजूरी, ₹122 करोड़ होंगे खर्च

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
53 मिनट पहले
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6 किलोमीटर रेल लाइन के दोहरीकरण से बढ़ेगी लौह अयस्क ढुलाई की क्षमता, प्रतिदिन मालगाड़ियों के परिचालन में भी आएगी तेजी



नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्व रेलवे के महत्वपूर्ण खनिज परिवहन मार्ग पर बड़बिल–बोलानी खदान के बीच 6 किलोमीटर रेलखंड के दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी दे दी है। परियोजना की स्वीकृत लागत ₹122 करोड़ है। इस दोहरीकरण से क्षेत्र में बढ़ते लौह अयस्क परिवहन को गति मिलने के साथ भविष्य की माल ढुलाई जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।


बड़बिल–बोलानी खदान रेलखंड वर्तमान में सिंगल लाइन है और इस मार्ग से प्रतिवर्ष करीब 9 मिलियन टन (90 लाख टन) माल की ढुलाई होती है। इसमें प्रतिदिन लगभग छह लोडेड रेक लौह अयस्क की आवाजाही शामिल है। यहां से मुख्य रूप से SAIL की बोलानी खदानों तथा निजी साइडिंग से उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क और पेलेट्स को प्रमुख स्टील संयंत्रों एवं बंदरगाहों तक भेजा जाता है।


रेलवे के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद इस रेलखंड पर अतिरिक्त 8.9 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) माल ढुलाई क्षमता उपलब्ध होगी। इससे मालगाड़ियों के विलंब में कमी आने के साथ रेक के सुचारू और तेज परिचालन में मदद मिलेगी।


बड़बिल–बोलानी खदान रेलखंड को भारतीय रेलवे के ‘ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट कॉरिडोर’ के अंतर्गत चिन्हित किया गया है। सेल की खदानों के विस्तार तथा भविष्य में बंदरगाहों और औद्योगिक संयंत्रों की क्षमता बढ़ने को देखते हुए इस 6 किलोमीटर रेलखंड का दोहरीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में खनन, औद्योगिक और बंदरगाह गतिविधियों के विस्तार के साथ बढ़ने वाली माल ढुलाई जरूरतों को पूरा करने में रेलवे को मदद मिलेगी। साथ ही, स्टील संयंत्रों और बंदरगाहों तक लौह अयस्क की आवाजाही के लिए रेल संपर्क और क्षमता मजबूत होगी तथा इस महत्वपूर्ण खनिज कॉरिडोर में मालगाड़ियों का परिचालन अधिक सुचारू हो सकेगा।

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