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रेलवे की सुरक्षा दावों के बावजूद ट्रेनों पर पत्थरबाजी का सिलसिला जारी

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
32 मिनट पहले
2 मिनट पठन

बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस की खिड़की का शीशा टूटा, यात्रियों में मची अफरा-तफरी; लगातार घटनाओं से सुरक्षा पर सवाल



चक्रधरपुर: रेलवे की ओर से ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। चक्रधरपुर रेल मंडल में एक के बाद एक ट्रेन पर पत्थर फेंके जाने की घटना सामने आ रही है। ताजा मामला ट्रेन संख्या 18415 बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस का है। पत्थरबाजी में ट्रेन के एक कोच की खिड़की का शीशा टूट गया। हालांकि घटना में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।


जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10 बजे बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस बड़ाजामदा से नोवामुंडी की ओर जा रही थी। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति ने चलती ट्रेन पर पत्थर फेंक दिया। पत्थर ट्रेन के सी 1 कोच की खिड़की पर लगा, जिससे बर्थ संख्या 20 के पास खिड़की का शीशा टूट गया। अचानक पत्थर लगने और शीशा टूटने से कोच में मौजूद यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।


गनीमत रही कि टूटे शीशे या पत्थर की चपेट में कोई यात्री नहीं आया। बावजूद इसके घटना के बाद यात्रियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। यात्रियों का कहना है कि चलती ट्रेन पर पत्थरबाजी न केवल रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि यात्रियों की जान के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है।



चक्रधरपुर रेल मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में पहले भी ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आती रही हैं। रेलवे सुरक्षा एजेंसी रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की ओर से ऐसे मामलों में संदिग्धों की पहचान और कार्रवाई के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है।


बताया जा रहा है कि रविवार को भी सीनी और महालीमुरूप के बीच एक विशेष ट्रेन को पत्थरबाजी का निशाना बनाए जाने की घटना सामने आई थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं को लेकर आरपीएफ ने जांच शुरू कर दी है। दोनों मामलों में पत्थर फेंकने वाले आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।


चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की बढ़ती घटनाएं रेलवे सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में सवाल यह है कि लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियान के बावजूद आखिर ट्रेनों को निशाना बनाने वालों पर पूरी तरह रोक कब लगेगी और कब सुकून से यात्री खिड़की वाली सीट पर बैठकर यात्रा कर पाएंगे।

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