top of page

घाटशिला में हेमंत-चंपई की अग्निपरीक्षा ! संथाल व कुड़मी समाज किसके तरफ? खबर पूरी डिटेल्स के साथ

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 6 नव॰ 2025
  • 3 मिनट पठन

न्यूज डेस्क

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) : पूर्वी सिंहभूम जिले की घाटशिला विधानसभा सीट पर उपचुनाव बेहद रोचक और त्रिकोणीय होने के पूरे आसार है. मुकाबला तीन पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच ही होने जा रहा है. झामुमो,भाजपा के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा वाली है. सीएम हेमंत सोरेन और पूर्व सीएम चंपई सोरेन के लिए यह उपचुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प होता दिख रहा है. 

11 नवबंर को मतदान,14 को परिणाम

घाटशिला विधानसभा सीट पर 2,56,352 मतदाता हैं, जिनमें 1,31,235 महिला मतदाता शामिल हैं. मतदान के लिए 231 स्थानों पर 300 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. मतदान 11 नवंबर 2025 को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर 2025 को की जाएगी.घाटशिला में मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार

घाटशिला सीट पर मुकाबला एक बार फिर तीन पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच दिलचस्प होता दिख रहा है. इस उपचुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन पर भरोसा जताया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को मैदान में उतारा है. जबकि झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) ने जयराम महतो के नेतृत्व में रामदास मुर्मू को टिकट दिया है, जिससे यह चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो गया है.

शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद उपचुनाव

घाटशिला में उपचुनाव राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन के बाद कराया जा रहा है. वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में झामुमो प्रत्याशी रामदास सोरेन ने 98,356 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की थी. वहीं भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को 75,910 वोट मिले थे. वे 22,446 मतों से पराजित हुए थे. तीसरे स्थान पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रत्याशी रामदास मुर्मू रहे थे, जिन्हें मात्र 8,092 वोट मिले थे. इस बार जयराम महतो ने एक बार फिर रामदास मुर्मू पर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दिया है.

संथाली और कुड़मी जाति ही करेंगे निर्णायक फैसला

घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में संथाल समुदाय की जनसंख्या सर्वाधिक है, जो यहां की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती है. इसके बाद सरदार (भूमिज), हरिजन, प्रधान (यादव), तेली, और कुड़मी समाज के मतदाता महत्वपूर्ण संख्या में हैं.साथ ही सवर्ण जातियों में ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत, और कायस्थ मतदाताओं की उपस्थिति भी उल्लेखनीय है. इसके अतिरिक्त जैन, सिख, ईसाई और मुस्लिम समुदाय के मतदाता भी यहां की सामाजिक विविधता को दर्शाते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुड़मी आंदोलन का असर इस बार के चुनाव में साफ दिखाई दे सकता है, क्योंकि जयराम महतो की पार्टी को आमतौर पर कुड़मी समाज की राजनीतिक आवाज़ के रूप में देखा जाता है.

घाटशिला में मुकाबला बेहद रोचक और भावनात्मक

घाटशिला का यह उपचुनाव अब न केवल झामुमो और भाजपा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है, बल्कि जेएलकेएम की मौजूदगी ने समीकरण को और पेचीदा बना दिया है. संताल मतदाताओं की एकजुटता, कुड़मी आंदोलन का प्रभाव, और चंपई सोरेन–हेमंत सोरेन गुट की राजनीतिक टकराहट , ये तीन प्रमुख कारक इस चुनाव की दिशा तय करेंगे. यदि जेएलकेएम के रामदास मुर्मू संथाली और कुड़मी वोटरों के बीच सेंध मारने में सफल हुए तो झामुमो के लिए परेशानी हो सकता है. इसलिए सीएम हेमंत सोरेन ,उनकी पत्नी, सरकार के कई मंत्री और गठबंधन के नेता पूरा जोर लगा रहे हैं. जनसभाओं में रामदास सोरेन की पत्नी को लाकर सहानुभूति का लाभ लेने का भी पूरा प्रयास किया जा रहा है. वहीं भाजपा के दो पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी और चंपई सोरेन भी संथाल वोटरों को अपने पक्ष में लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.जिससे यह मुकाबला रोचक और भावनात्मक बन गया है.

 

 

टिप्पणियां


bottom of page