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भिलाई रेलवे में CBI का बड़ा एक्शन: Senior DME गिरफ्तार, 77 लाख कैश और 14 लाख का सोना बरामद

  • लेखक की तस्वीर: Rahul
    Rahul
  • 1 दिन पहले
  • 2 मिनट पठन

भिलाई: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के भिलाई पीपी यार्ड में तैनात भारतीय रेलवे यांत्रिक अभियंता सेवा (IRSME) के अधिकारी एवं वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (Senior DME) अनमोल उइके को सीबीआई ने करीब 24 घंटे चली कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किया है। रिश्वतखोरी के आरोप में हुई इस कार्रवाई ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच खलबली मचा दी है। सीबीआई की तलाशी में अधिकारी के ठिकानों से लगभग 77 लाख रुपये नकद और 14 लाख रुपये से अधिक कीमत का सोना बरामद होने की बात सामने आई है।


मामला उस समय गरमा गया, जब एक शिकायतकर्ता ने सीबीआई से शिकायत की कि उसके लंबित बिलों को पास करने और भुगतान की मंजूरी देने के बदले Senior DME अनमोल उइके ने 2 लाख रुपये रिश्वत की मांग की। बातचीत के बाद सौदा 1 लाख रुपये में तय हुआ।


रिश्वत की पहली किस्त लेते ही CBI का शिकंजा


शिकायत की पुष्टि के बाद सीबीआई ने 13 अगस्त को जाल बिछाया। आरोप है कि अधिकारी के निर्देश पर उसके बिचौलिए ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये स्वीकार किए। इसी दौरान पहले से तैयार सीबीआई टीम ने अधिकारी और बिचौलिए को पकड़ लिया।


गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ा। सीबीआई ने आरोपी अधिकारी के रायपुर और भिलाई स्थित आवास तथा कार्यालय परिसरों में तलाशी ली। इस दौरान बड़ी मात्रा में नकदी और सोने के आभूषण बरामद होने से जांच एजेंसी की कार्रवाई और गंभीर हो गई।


77 लाख कैश...14 लाख का सोना


तलाशी में करीब 77 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की बात सामने आई है। इसके अलावा लगभग 14 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण भी मिले हैं। अब सीबीआई बरामद संपत्ति के स्रोत और अधिकारी की आय के ज्ञात साधनों के बीच संबंध की जांच कर रही है।


4 दिन की CBI हिरासत


मामले में गिरफ्तार Senior DME अनमोल उइके और बिचौलिए को 14 अगस्त 2026 को अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायालय ने दोनों को चार दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया।


यह कार्रवाई सिर्फ एक रिश्वत के मामले तक सीमित नहीं मानी जा रही है। लंबित बिलों को मंजूरी देने के बदले रिश्वत की मांग और तलाशी में मिली बड़ी नकदी ने रेलवे की कार्यप्रणाली, ठेकेदारों से जुड़े भुगतान और अधिकारियों की कथित संपत्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


अब सीबीआई की जांच इस बात पर केंद्रित रहेगी कि बरामद 77 लाख रुपये नकद और सोने की संपत्ति का स्रोत क्या है, क्या रिश्वतखोरी का यह मामला अकेले अधिकारी तक सीमित था और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।


एक रिश्वत की शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई अब करोड़ों की संभावित काली कमाई के सवाल तक पहुंच गई है।

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