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कैफोर्ड हाउस के ध्वस्तीकरण के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा मामला, संरक्षण की मांग

लेखक की तस्वीर: Jay Kumar
Jay Kumar
7 घंटे पहले
2 मिनट पठन

जमशेदपुर: झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर कैफोर्ड हाउस के ध्वस्तीकरण को लेकर विरोध तेज हो गया है। वर्ष 1884 में निर्मित इस ब्रिटिशकालीन भवन को संरक्षित करने की मांग को लेकर अधिवक्ता विकास चंद्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से ध्वस्तीकरण रोकने और भवन के संरक्षण की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर 16 जून 2026 को रांची हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका का फिलिंग नंबर 6980/2026 और CNR नंबर JHHC01-020425-2026 बताया गया है।


विकास चंद्र के अनुसार, 140 वर्ष से अधिक पुराना कैफोर्ड हाउस झारखंड के प्रशासनिक और स्थापत्य इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। उनके मुताबिक यह भवन छोटानागपुर क्षेत्र के शुरुआती प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण रहा है और बाद में मुख्यमंत्री आवास के रूप में भी उपयोग किया गया।


प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया कि भवन निर्माण विभाग ने भवन को असुरक्षित बताते हुए इसके ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया है। इसके स्थान पर करीब 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक मुख्यमंत्री आवास परिसर बनाने की योजना है। विरोध कर रहे पक्ष का कहना है कि ध्वस्तीकरण से पहले भवन का ऐतिहासिक और तकनीकी मूल्यांकन तथा संरक्षण की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।


उन्होंने दावा किया कि 17 मार्च 2026 को ASI तथा 20 अप्रैल 2026 को भवन निर्माण विभाग, मुख्य सचिव और रांची उपायुक्त को स्पीड पोस्ट के जरिए संरक्षण की मांग को लेकर आवेदन भेजे गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।


याचिकाकर्ता ने कैफोर्ड हाउस को हेरिटेज बिल्डिंग का दर्जा देने, संरक्षण एवं पुनरुद्धार करने तथा संग्रहालय या सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की है। साथ ही न्यायालय से ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक लगाने और मामले में आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया गया है।


अधिवक्ता विकास चंद्र ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरें केवल भवन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास और सांस्कृतिक पहचान की विरासत हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो यह क्षति स्थायी हो सकती है।

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