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तीन दशक बाद पश्चिमी सिंहभूम में नक्सलवाद का खात्मा! 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर समेत चार माओवादियों ने डाले हथियार

  • लेखक की तस्वीर: Rahul
    Rahul
  • 2 दिन पहले
  • 3 मिनट पठन

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। करीब तीन दशक से नक्सली हिंसा और माओवादी गतिविधियों का दंश झेल रहे जिले में आखिरकार वह वक्त आ गया, जब पुलिस ने पश्चिमी सिंहभूम को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया। कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा के दुर्गम जंगल-पहाड़ी इलाकों में सक्रिय आखिरी चिन्हित और वांछित माओवादी कैडरों में शामिल 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर समेत चार नक्सलियों ने पुलिस और सीएपीएफ के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।


चाईबासा पुलिस लाइन में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम में कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किसपोट्टा, पश्चिमी सिंहभूम एसपी अमित रेनू, चक्रधरपुर एसडीपीओ डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी समेत पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने आत्मसमर्पण को जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लंबी लड़ाई का निर्णायक पड़ाव बताया।


आत्मसमर्पण करने वालों में सालुका कायम के अलावा कोदोमुनी कोड़ा, पिंकी पूर्ती और अनिता तामसोय शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक सालुका कायम के खिलाफ चाईबासा जिले में 90 और सरायकेला-खरसावां जिले में छह मामले दर्ज हैं। यानी उसके खिलाफ कुल 96 आपराधिक मामले दर्ज हैं। आत्मसमर्पण के दौरान उसने एक AK-47 राइफल, दो मैगजीन और 843 राउंड जिंदा कारतूस समेत अन्य सामान पुलिस को सौंपा।



तीन चरणों में 53 माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता


यह सफलता ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत मिली है। पुलिस के अनुसार ऑपरेशन नवजीवन के जरिए माओवादी संगठन में सक्रिय कैडरों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापस लाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके पहले 21 मई 2026 को ऑपरेशन नवजीवन-I के तहत 25 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनके पास से 16 हथियार और 3,082 गोलियां बरामद हुई थीं।


इसके बाद 28 जुलाई को ऑपरेशन नवजीवन-II के तहत 14 नक्सल कमांडरों और सदस्यों ने हथियार डाले थे। इनके पास से 10 हथियार और 1,412 गोलियां बरामद हुई थीं। अब चार और माओवादियों के आत्मसमर्पण के साथ तीन चरणों में कुल 53 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं।


अभियान ने तोड़ी माओवादी संगठन की कमर


पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 से जुलाई 2026 तक पश्चिमी सिंहभूम में 49 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 22 माओवादी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए और 60 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में हथियार, विस्फोटक और आईईडी भी बरामद किए गए।


पुलिस का कहना है कि सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट में लगातार संयुक्त अभियान, सुरक्षा बलों के नए कैंप, घेराबंदी और गिरफ्तारी के साथ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है।



पुलिस के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार स्वास्थ्य शिविर और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे कार्यक्रमों से ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास भी बढ़ा है। चक्रधरपुर एसडीपीओ डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी की पहल पर सालुका कायम के प्रभाव वाले इलाकों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों ने भी ग्रामीणों के बीच सकारात्मक माहौल बनाने में भूमिका निभाई।


नक्सल प्रभावित इलाके अब विकास की राह पर


सारंडा और पोड़ाहाट के जिन जंगलों में कभी माओवादी गतिविधियां सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती हुआ करती थीं, वहां अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मंगलवार का आत्मसमर्पण जिले में तीन दशक से चले आ रहे नक्सल संघर्ष का निर्णायक पड़ाव है।


पुलिस ने दावा किया कि पश्चिमी सिंहभूम में अब कोई भी चिन्हित और वांछित नक्सली शेष नहीं बचा है। नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही अब जिले के दुर्गम इलाकों में विकास और जनकल्याण की गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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