तीन महीने में स्क्रैप बना एक करोड़ का रेलवे शेड, कार्रवाई के बजाय खामोशी; जिम्मेदार अधिकारियों पर उठे सवाल
- Rahul
- 1 दिन पहले
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राउरकेला: राउरकेला रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने नव निर्मित शेड के टूट कर गिरने की घटना को 72 घंटे बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार रेल अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह शेड महज तीन महीने के भीतर टूटकर अब स्क्रैप में तब्दील हो चूका है। घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने टूटे शेड को खोलकर क्रेन की मदद से बड़े वाहनों में लादकर राउरकेला रेलवे कॉलोनी स्थित ट्रेनिंग स्कूल परिसर में रखवा दिया है।
शेड की हालत देखकर रेलवे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और कथित भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का सवाल है कि आखिर करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन से तैयार किए गए निर्माण की ऐसी स्थिति महज तीन महीने में कैसे हो गई। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि शेड के निर्माण में निर्धारित छह एमएम की जगह चार एमएम थिकनेस वाली पाइप का इस्तेमाल किया गया। साथ ही पाइप को जोड़ने के लिए की गई वेल्डिंग की गुणवत्ता भी बेहद खराब होने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जिस स्थान पर शेड का निर्माण किया गया था, वहां से राउरकेला रेलवे एडीईएन कार्यालय की दूरी महज करीब दो किलोमीटर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई। यदि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई थी, तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इसे क्यों नहीं रोका? हादसे के बाद भी जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई करने में हो रही देरी ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है।
राउरकेला रेलवे स्टेशन के निकट स्थित एसटी कॉलोनी में कुछ महीने पहले निर्मित बॉउंड्री वॉल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों में दीवार में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। खास बात यह है कि इस बॉउंड्री वॉल का निर्माण भी उसी ठेकेदार द्वारा कराया गया था, जिसने रेलवे स्टेशन का शेड बनाया था। ऐसे में रेलवे प्रशासन से दोनों निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है।
उल्लेखनीय है की राउरकेला रेलवे स्टेशन पर कुछ महीने पहले एक रेलकर्मी को कथित तौर पर बिना पावर ब्लॉक लिए एक ब्रिज पर काम करने के लिए चढ़ाए जाने का मामला भी सामने आया था। आरोप है कि उस समय राउरकेला एडीईएन और आईओडब्ल्यू की मौजूदगी में रेलकर्मी को काम पर लगाया गया था। काम के दौरान दुर्घटना में उक्त रेलकर्मी ट्रैक्शन करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था। इस घटना को भी रेलवे प्रशासन द्वारा लिपापोती कर दी गई थी। जबकि इस घटना ने रेलवे में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
लगातार सामने आ रहे निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े मामलों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं होने से रेलकर्मियों और आम लोगों में नाराजगी देखि जा रही है। लोगों का सवाल है कि यदि किसी निर्माण में मानकों की अनदेखी हुई या सुरक्षा नियमों से समझौता किया गया, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
आम लोगों ने रेल मंत्री और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से राउरकेला रेलवे स्टेशन के शेड निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही मौजूदा रेल अधिकारियो के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई करने तथा सरकारी धन के नुकसान की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।





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