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एक ही विभाग, दो पानी टंकियां—निर्माण की रफ्तार में बड़ा अंतर

लेखक की तस्वीर: Rahul
Rahul
16 घंटे पहले
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सी-सेक्टर में फाउंडेशन के बाद ठप पड़ा काम, ई-सेक्टर की टंकी छत तक पहुंची; जीएम से कार्रवाई की मांग



चक्रधरपुर: चक्रधरपुर रेल मंडल के बंडामुंडा रेलखंड के सी-सेक्टर और ई-सेक्टर कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से रेलवे प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से नई ओवरहेड पानी टंकियों का निर्माण कराया जा रहा है। पुरानी और जर्जर पानी टंकियों को हटाकर नई टंकियां बनाने की इस योजना से स्थानीय लोगों को बेहतर जलापूर्ति की उम्मीद है।


लेकिन दोनों स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्य की रफ्तार में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है। सी-सेक्टर कॉलोनी स्थित बंडामुंडा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के खेल मैदान में निर्माणाधीन पानी टंकी का फाउंडेशन तैयार करने के बाद ठेकेदार द्वारा काम आगे नहीं बढ़ाया गया है।


वहीं दूसरी ओर ई-सेक्टर में निर्माणाधीन पानी टंकी का काम तेजी से आगे बढ़ते हुए लगभग छत के स्तर तक पहुंच चुका है। ऐसे में एक ही रेलवे प्रशासन के अधीन और लगभग समान उद्देश्य से किए जा रहे दोनों निर्माण कार्यों की गति में इतना अंतर होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों निर्माण कार्य बंडामुंडा आईओडब्ल्यू-2 कार्यालय की देखरेख में कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद जहां ई-सेक्टर की पानी टंकी का निर्माण अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, वहीं सी-सेक्टर की टंकी का काम शुरुआती चरण में ही रुक गया है।



इससे निर्माण की गुणवत्ता, कार्य की निगरानी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में नाराजगी है। सी-सेक्टर के लोगों का कहना है कि नई पानी टंकी का निर्माण पूरा होने से लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या के समाधान में मदद मिल सकती है। ऐसे में निर्माण कार्य को इस तरह अधूरा छोड़ना स्थानीय लोगों के हित में नहीं है। लोगों ने दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक से मामले की जांच कराने, निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारणों का पता लगाने तथा जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।


स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि रेलवे के उच्चाधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे, ताकि सी-सेक्टर की नई पानी टंकी का निर्माण भी जल्द पूरा हो और क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति सुचारु हो सके।

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