एक करोड़ का शेड भरभराकर गिरा, राउरकेला स्टेशन पर रेलवे की निर्माण गुणवत्ता की खुली पोल
- Rahul
- 42 मिनट पहले
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हादसे के बाद चक्रधरपुर रेल मंडल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, आईओडब्ल्यू निलंबित; एडीईएन की भूमिका भी जांच के घेरे में

राउरकेला/चक्रधरपुर : चक्रधरपुर रेल मंडल के राउरकेला रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब मुख्य प्रवेश द्वार के सामने हाल ही में बनाया गया नया शेड अचानक भरभराकर धराशायी हो गया। बताया जा रहा है कि शेड के निर्माण में करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने की चर्चा है। हालांकि रेलवे ने फिलहाल निर्माण की वास्तविक लागत की पुष्टि नहीं की है। गनीमत रही कि हादसे के वक्त शेड के नीचे कोई यात्री मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी।
शेड के अचानक गिरने की घटना ने चक्रधरपुर रेल मंडल में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि जिस निर्माण को रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए तैयार कराया था, वह तैयार होने के कुछ ही समय बाद कैसे धराशायी हो गया?
निर्माण गुणवत्ता को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार, शेड के निर्माण के दौरान ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे। करीब एक महीने पहले मीडिया में भी निर्माण में कथित अनियमितता और इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल सामने आए थे। इसके बावजूद यदि रेलवे प्रशासन ने समय रहते इसकी तकनीकी जांच नहीं कराई, तो अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या समय रहते कार्रवाई होती तो हादसे को रोका जा सकता था?
सूत्रों के अनुसार, निर्माण में इस्तेमाल किए गए लोहे के पाइप की मोटाई को लेकर भी सवाल हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर करीब चार एमएम मोटाई के पाइप का इस्तेमाल किया गया, जबकि टेंडर की शर्तों के अनुसार छह एमएम मोटाई का पाइप इस्तेमाल किया जाना था। इसके अलावा शेड के लोहे के हिस्सों में की गई वेल्डिंग की गुणवत्ता को भी कमजोर बताया जा रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

हादसे के बाद अधिकारियों में मचा हड़कंप
शेड गिरने की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अभियंता स्तर के अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। रेलवे की ओर से घटना की जांच के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड के अधिकारियों की टीम गठित की गई है।
रेलवे ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए राउरकेला के आईओडब्ल्यू/सीनियर सेक्शन इंजीनियर तुहिन सतपथी को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा रेलवे ने संबंधित ठेका कंपनी पर जुर्माना लगाए जाने और निर्माण कार्य के लिए किए गए भुगतान की राशि वापस वसूलने की बात कही है।
सिर्फ एक कर्मचारी पर कार्रवाई को लेकर सवाल
रेलवे की कार्रवाई के बाद अब एक और सवाल खड़ा हो गया है कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी थी, तो उसकी निगरानी की जिम्मेदारी केवल आईओडब्ल्यू की थी या अन्य अधिकारी भी इसके लिए जवाबदेह थे?
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की निगरानी में आईओडब्ल्यू के साथ-साथ एडीईएन स्तर के अधिकारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई, सामग्री की तकनीकी जांच किसने की और निर्माण कार्य को स्वीकृति किस आधार पर दी गई।
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि निर्माण में मानकों की अनदेखी हुई थी, तो निर्माण के दौरान ही इसे क्यों नहीं रोका गया? साथ ही भुगतान से पहले गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच किस स्तर पर की गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

रेलवे ने कहा—जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
राउरकेला शेड हादसे को लेकर चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने रेलवे का पक्ष रखते हुए कहा कि रेलवे ने घटना को गंभीरता से लिया है। मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की गई है। ठेका कंपनी पर जुर्माना लगाया गया है और निर्माण कार्य के लिए किया गया भुगतान भी वापस वसूल लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि शेड की वास्तविक निर्माण लागत के संबंध में पूछे जाने पर सीनियर डीसीएम ने स्पष्ट आंकड़ा बताने से परहेज किया। सूत्रों के अनुसार, शेड की लागत एक करोड़ रुपये से अधिक होने की चर्चा है, लेकिन रेलवे की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा रही है।
रेल मंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने रेल मंत्री और रेलवे के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जांच केवल एक अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों, ठेका कंपनी, तकनीकी निगरानी और भुगतान प्रक्रिया की भी पूरी जांच होनी चाहिए।
सवाल अब सिर्फ शेड के गिरने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों की निगरानी किस तरह की गई। करोड़ों की रेलवे व्यवस्था में यदि एक नया शेड इतनी जल्दी धराशायी हो जाता है, तो यह घटना निर्माण गुणवत्ता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह महज तकनीकी खामी थी या इसके पीछे निर्माण में गंभीर लापरवाही हुई थी।





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