एक दिन में दो रेल हादसे, चक्रधरपुर मंडल में सुरक्षित ट्रेन परिचालन पर उठे सवाल
- Rahul
- 14 घंटे पहले
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मालुका में पटरी से उतरा मालगाड़ी का डिब्बा, 400 से अधिक कंक्रीट स्लीपर क्षतिग्रस्त

चक्रधरपुर: चक्रधरपुर रेल मंडल में सोमवार को एक ही दिन दो अलग-अलग रेल हादसों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बांसपानी स्टेशन के पास मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतर गया, जबकि मालुका स्टेशन के पास मालगाड़ी का एक डिब्बा पटरी से उतरने के बाद भी ट्रेन काफी दूर तक चलती रही। इस दौरान 400 से अधिक कंक्रीट स्लीपर क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है।
बांसपानी की घटना के बाद डांगवापोसी से रिलीफ ट्रेन मौके पर पहुंची और शाम करीब पांच बजे इंजन को दोबारा पटरी पर लाया गया।
वहीं मालुका की घटना ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। मालगाड़ी के पीछे लगा एक डिब्बा पटरी से उतर गया, लेकिन चालक को इसकी जानकारी नहीं हुई और ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त डिब्बे के साथ करीब 10 खंभों की दूरी तक आगे बढ़ गई। इससे रेल पटरी और सैकड़ों स्लीपर क्षतिग्रस्त हो गए।

घटना के बाद चक्रधरपुर रेल मंडल मुख्यालय से बचाव दल सड़क मार्ग से मालुका पहुंचा। भारी मशक्कत के बाद सोमवार रात करीब 11 बजे दुर्घटनाग्रस्त डिब्बे को पटरी पर लाया गया। क्षतिग्रस्त स्लीपरों को बदलने का काम भी जारी रहा।
बिना हूटर बजाये हुआ बचाव राहत का काम, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ
खास बात यह है कि चक्रधरपुर रेल मंडल में रेल हादसों के मामलों को भी गंभीरता से नहीं लिया जाता। रेल हादसों को छुपाने के लिए बिना हूटर बजाये गुपचुप तरीके से बचाव राहत का काम किया जाता है। सोमवार को हुए दो रेल हादसों में भी यही देखा गया। बिना हूटर बजाये दोनों जगह बचाव राहत का काम किया गया। जो कि सुरक्षा मानकों और नियमों से सीधे तौर पर खिलवाड़ है।
एक ही दिन में दो हादसों ने ट्रैक की निगरानी, मालगाड़ी के वैगन फिटनेस और परिचालन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि पटरी से डिब्बा उतरने के बाद भी ट्रेन इतनी दूर तक कैसे चलती रही? क्या समय रहते इसकी जानकारी नहीं मिल सकी?
लगातार हो रही घटनाओं के बीच अब रेलवे बोर्ड स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और हादसों की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।





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