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चक्रधरपुर के शहर के अन्दर पुलिया निर्माण में भारी अनियमितता, बालू की जगह स्टोन डस्ट से हो रहा है पुलिया की ढलाई, कमजोर पुलिया बनाकर हो रही बड़े हादसे की पलानिंग

  • लेखक की तस्वीर: Rahul
    Rahul
  • 14 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन

चक्रधरपुर:  चक्रधरपुर में शहर के अन्दर करोड़ों के पुलिया निर्माण कार्य में बालू की जगह स्टोन डस्ट इस्तेमाल करने का गंभीर मामला सामने आया है. इस मामले का किसी और ने नहीं बल्कि स्थानीय वार्ड पार्षद सपन मिस्त्री ने खुलासा कर सबको चौंका दिया है. सरकारी योजना के निर्माण में भ्रष्टाचार के घालमेल के इस मामले ने पुलिया निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल कर रख दी है.


मामला चक्रधरपुर के पुरानी बस्ती में बन रहे पुलिया निर्माण कार्य का है. सपन मिस्त्री ने मामले का खुलासा करते हुए ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल को पत्र लिख कर पुलिया निर्माण कार्य में अनियमितता बरतने और गुणवत्ता से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है. सपन मिस्त्री ने ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल को लिखे शिकायत पत्र में लिखा है कि चक्रधरपुर पुरानी बस्ती बलिया घाट में बन रहे पुलिया में बालू की जगह स्टोन डस्ट मिलाकर ढलाई की जा रही है.



सपन मिस्त्री ने कहा है कि बालू की जगह स्टोन डस्ट से ढलाई किये जाने से पुलिया को मजबूत बनाने की जगह अत्यधिक कमजोर बनायी जा रही है. यह पुलिया कमजोर बनने से ज्यादा दिन तक टिक नहीं पायेगी. किसी भी वक्त पुलिया में हादसे का खतरा बना रहेगा. तेज बारिश में नदियों के उफान में पुलिया के ध्वस्त होकर ढहने और बहने का भी खतरा बन जायेगा. पुलिया के घटिया निर्माण से होने वाली दुर्घटना और खतरे के साथ साथ सरकारी राशि के दुरुपयोग और जानमाल के खतरे को ध्यान में रखते हुए यथा शीघ्र पुलिया के घटिया निर्माण कार्य को रोकने की मांग सपन मिस्त्री ने की है.



साथ ही साथ उन्होंने पुलिया निर्माण में अब तक हुए कार्य के गुणवत्ता की जांच स्वतंत्र एजेंसी से करने की मांग की है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण तरीके से शुरू करने की मांग सपन मिस्त्री ने की है. जाँच में स्टोन डस्ट से ढलाई का खुलासा होने पर स्टोन डस्ट से ढलाई वाले हिस्से को तोड़कर गुणवत्तापूर्ण ढलाई की मांग की गयी है.


बता दें कि पश्चिम सिंहभूम में पुलिया निर्माण कार्य में अनियमितता बरतने का यह कोई नया मामला नहीं है. इससे पहले भी कई मामले ऐसे आ चुके हैं. लेकिन हैरत की बात यह है कि ऐसे गंभीर मामलों में प्रशासन केवल लिपा पोती का काम करने में जुट जाती है. जिसका परिणाम यह होता है कि पुलिया कुछ सालों के बाद धंसने और टूटने लग जाती हैं.



जिले में अभी कई ऐसे पुलिया हैं जो धंसने के कारण अब उपयोग में नहीं हैं. जानकर बताते हैं कि सरकारी योजना के गुणवत्ता से खिलवाड़ इसलिए की जाती है ताकि ठेकेदार इंजीनियर और कई सरकारी अधिकारी मिलकर योजना के बड़े राशी का भाग डकार जाएँ. पुलिया तो बनने के बाद बाहर से चकाचक दिखेगा लेकिन अन्दर से खोखला होगा.


इसलिए समय रहते इस तरह के मामलों में गुणवत्ता पर ध्यान देना जरुरी है. उम्मीद की जानी चाहिए कि पुलिया निर्माण में प्रशासन गंभीरता से ध्यान देगी और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई कर पुलिया का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराएगी.

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