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दिशोम गुरू के निधन के बाद राज्य में अचानक क्यों तेज हुई राजनीतिक हलचल, जानिए इस पॉलिटिकल रिपोर्ट में

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 7 अग॰ 2025
  • 1 मिनट पठन

 

रांची डेस्क

रांची  ( RANCHI) : पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरू शिबू सोरेन के निधन से अभी पूरा झारखंड शोक में डुबा है. लेकिन अंदर ही अंदर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. राजनीतिक चर्चाओं का बाजार शुरू हो चुका है. सबसे पहले गुरूजी के राज्यसभा सदस्यता को लेकर राजनीति में चर्चा शुरू हो गई है. गुरूजी राज्यसभा के सदस्य थे और उनके निधन से यह सीट खाली हो गया है और इसके लिए कई दावेदार इंडी गठबंधन में सामने आ सकते हैं.

6 माह के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य

गुरूजी का राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून 2026 तक था, वे 22 जून 2020 को राज्यसभा के लिए चुने गए थे. यानि अभी एक साल से कुछ कम समय बचा था.  उनके निधन के कारण अब निर्वाचन आयोग को समय से पहले ही इस सीट के लिए चुनाव कराना होगा.

राज्य समन्वय समिति का गठन

गुरूजी झारखंड राज्य समन्वय समिति के अध्यक्ष भी थे, 2022 में उनके नेतृत्व में इसका गठन किया गया था. अब उनके निधन से यह पद भी रिक्त हो गया है. इस समिति का कार्यकाल 25 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है. इसलिए 5 नवंबर तक इस समन्वय समिति का गठन करना भी सरकार के लिए जरूरी है. ऐसे में इस पद के लिए भी इंडी गठबंधन के में कई बड़े नेता दावा ठोंक सकते हैं. इस समिति में राज्यसभा सदस्य सरफराज अहमद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, झामुमो महासचिव विनोद पांडेय और वरिष्ठ नेता फागू बेसरा जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं.  

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