
अब्दुल ममून और बबली बेगम ने नहीं बदला धर्म, पर रख लिया हिन्दू नाम,क्यों और कैसे छुपाई पहचान ? पढ़कर दंग रह जाएंगे आप
29 नव. 2025
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न्यूज डेस्क
रांची ( RANCHI) : बंगाल,बिहार और झारखंड में ही बांग्ला देशी घुसपैठ नहीं रह रहे, देश के कोने-कोने में बांग्लादेशी घुसपैठिए पहुंच चुके हैं और इन्हें पहचानना पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है. अब्दुल ममून और बबली बेगम की तरह हजारों बांग्लादेशी घुसपैठ हैं जो धर्म तो नहीं बदलते, लेकिन भारतीय नागरिकता के लिए हिन्दू नाम रखकर फर्जी तरीके से आधार कार्ड,राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और वोटर कार्ड बना लेते हैं. इसके लिए उन्हें कुछ हजार रुपए ही खर्च करने पड़ते हैं. फिर उसके बाद सीना तान कर भारतीय नागरिक बोलते हैं और बिना किस ी डर-भय के खुल कर जीवन जीते हैं. लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसी ऐसे घुसपैठियों की पहचान करने में सफल भी हो रही है.
बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठ देवभूमि को अपना ठिकाना बनाने में लगे हैं, बांग्लादेशी घुसपैठ को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस यहां ऑपरेशन कालनेमी चला रही है. इसी क्रम में अब्दुल ममून और बबली बेगम को पुलिस ने पकड़ा और पूछताछ की ऐसी जानकारी मिली कि पुलिस और एजेंसी के अधिकारी भी दंग रह गए. पहले अब्दुल ममून के बारे में जानते हैं कि वह कैसे भारत आया और कैसे सारे कागजात बना लिया, इस काम में किसने उसकी मदद की.

फेसबुक के जरिए बांग्लादेशी अब्दुल ने हिन्दू विवाहिता को पटाया
फेसबुक के माध्यम से अब्दुल ममून देहरादू न की एक विवाहित महिला रीना चौहान के संपर्क में आया. दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई थी. रीना ने अपने पति को छोड़ दिया. 2019, 2020 और 2021 में अब्दुल टूरिस्ट वीजा लेकर बांग्लादेश से देहरादून रीना से मिलने आया. इस दौरान दोनों दून में साथ में रहे. बाद में अब्दुल ने रीना चौहान को बांग्लादेश ले जाकर धर्मांतरण करा दिया और उसे फरजाना अख्तर नाम दिया. इसी नाम से बांग्लादेश में फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए थे. बांग्लादेशी एजेंसी के जरिए दून पुलिस ने यह कागज हासिल कर लिए हैं. बांग्लादेश से भेजे दस्तावेजों में फरजाना अख्तर के नाम से जारी दस्तावेज मिला है. इसमें रीना चौहान की फोटो लगी हुई है.
निकाह के बाद अब्दुल रीना अब फरजाना को लेकर अवैध तरीके से बॉर्डर क्रास कर भारत में प्रवेश कर गए. वहां से दोनों देहरादून पहुंचे और किराए के घर में रहने लगे थे.दोनों की 11 माह की बच्ची भी है. इस दौरान उनका संपर्क खुशबू आलम उर्फ मंजू दीदी से हुआ. 2021 में खुशबू आलम ने रीना पूर्व पति सचिन चौहान के नाम से अब्दुल ममून का फर्जी दस्तावेज बना कर नई पहचान दे दी. इसके लिए सबसे पहले मतदाता पहचान पत्र, इसके बाद आधार और पेन कार्ड बना. फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए खुशबू आलम ने अब्दुल से 15 हजार रुपए लिए.फिलहाल दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और अब खुशबू आलम की तलाश कर रही है.
मात्र ढ़ाई हजार में ही बबली बेगम ने बना लिए सारे दस्तावेज
अब्दुल ममून की तरह 28 साल की बबली बेगम भी बांग्लादेश की रहने वाली है और उसने भी कोविड काल में ही अवैध तरीके से सीमा पार कर भारत में आई. भारत में आने के बाद बबली बेगम सीधे दिल्ली पहुंची और सोफिया नाम की क महिला से मिली. सोफिया ने बबली को देहरादून भेज दिया. बबली ने दून के पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र में दिनेश शर्मा नाम के एक व्यक्ति को अपना पति नाम से पहले आधार कार्ड बना लिया, जिसमें उसने अपना नाम भूमि शर्मा रख लिया. आधार कार्ड बनने के बाद भूमि शर्मा नाम से दून में राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आयुष्मान कार्ड जैसे दस्तावेज बनवा लिए. इन दस्तावेजों के लिए बबली ने महज ढ़ाई हजार रुपए ही खर्च की. बबली बेगम ने सरकारी राशन लेने के साथ ही आयुष्मान कार्ड से मुफ्त उपचार का लाभ भी उठाया. दस्तावेज बनने से पहले बबली देहरादून में छू-छूप कर रहती थी, लेकिन सारे दस्तावेज बनने के बाद वह खुल कर रहने लगी, लेकिन ऑपरेशन कालनेमी की नजर से वह बच नहीं पाई और पकड़ी गई. पुलिस ने जब बबली से पूछताछ की और तलाशी ली तो सच्चाई सामने आ गई. तलाशी में बबली के पास से सारे दस्तावेज के साथ बबली बेगम नाम से बांग्लादेशी पहचान पत्र बरामद हुआ,जिसमें उसकी तस्वीर लगी है.











