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सारंडा में पेयजल गहराया संकट,तो सड़क पर उतरे आदिवासी, 15 दिन में पानी नहीं तो एनएच जाम की दी चेतावनी

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 8 जन॰
  • 2 मिनट पठन

संवाददाता

 गुवा ( GUVA) : नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र के गंगदा पंचायत में वर्षों से चला आ रहा पेयजल संकट अब उग्र जनआक्रोश में बदल गया है. पंचायत के 14 गांवों के हजारों ग्रामीण पिछले आठ–नौ साल से बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे हैं, जबकि सरकारी कागजों में करोड़ों रुपये की जलापूर्ति योजनाएं पूरी दिखा दी गई हैं. इसको लेकर गंगदा गांव में मुंडा जोगो सुरीन और पंचायत मुखिया राजू शांडिल की संयुक्त अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि 15 दिनों के भीतर सभी गांवों में पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक पानी नहीं पहुंचाया गया, तो एनएच-33 स्थित सलाई चौक को अनिश्चितकाल के लिए जाम कर दिया जाएगा.

ग्रामीणों ने कहा कि इससे पहले भी कई बार आंदोलन और सड़क जाम किए गए, लेकिन हर बार प्रशासन, विभाग और संवेदक ने झूठे आश्वासन देकर आंदोलन तुड़वा दिया. मुखिया राजू सांडिल ने आरोप लगाया कि संवेदक हर आंदोलन के बाद केवल दिखावटी सक्रियता दिखाता है. जगह-जगह पाइप गिरा दिए गए हैं, जो महीनों से यूं ही पड़े हैं. न बिछाव हुआ, न कनेक्शन दिया गया. ग्रामीणों के अनुसार यह विकास नहीं, बल्कि खुली धोखाधड़ी है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2017-18 में मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना के तहत हर घर नल, हर घर जल का वादा किया गया था. लगभग 15 करोड़ रुपये की योजना की पूरी राशि निकाल ली गई, लेकिन आज भी अधिकांश गांवों में न पाइपलाइन है, न नल, न चापाकल और न डीप बोरिंग. गर्मी के मौसम में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मीलों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सड़क जाम होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग मनोहरपुर–चक्रधरपुर प्रमंडल और संबंधित ठेकेदार की होगी.

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