
राज्य के युवाओं के साथ बड़ा घोखा, स्वीकृत पदों में सरकार कर रही भारी कटौती, आंकडों से आजसू का खुलासा
12 सित. 2025
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न्यूज डेस्क
रांची ( RANCHI) : आजसू ने सरकार की वादख़िलाफ़ी को लेकर सरकार पर हमला बोला है. आजसू पार्टी के महासचिव सह प्रवक्ता संजय मेहता ने आजसू पार्टी मुख्यालय, रांची में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सरकार को आँकड़ों के आधार पर आईना दिखाया. उन्होंने सरकार को नौकरी देने में विफल होने पर जमकर कोसा. उन्होंने कहा की हेमंत सोरेन की सरकार नौकरी देने में फेल साबित हुई है. सरकार के द्वारा युवाओं के सपनों का क़त्ल किया जा रहा है. सरकार अपने वादे अनुसार नौकरी देने में असफल रही है. युवाओं को हर मामले को लेकर कोर्ट जाना पड़ रहा है.

सरकारी नौकरी देने और बेरोजगारी भत्ता देने का वादा
पिछली बार भी सरकार ने यह वादा किया था की हम प्रत्येक साल 5 लाख रोजगार देंगे. 5 साल में 25 लाख नौकरी और बेरोजगारी भत्ता देने का झूठ बोलकर युवाओं के भविष्य और सपनों को मारा गया. सरकार पिछले कार्यकाल में भी नौकरी देने में विफल रही. दूसरे कार्यकाल में भी सरकार नौकरी के सवाल पर झारखंड के युवाओं को ठग रही है.
दूसरे कार्यकाल में चुनाव से पूर्व घोषणा में मुख्यमंत्री जी ने कहा था की दस लाख सरकारी नौकरी देंगे. सरकार का यह दावा भी फेल होता जा रहा है. सरकार किसी भी परीक्षा का पारदर्शी तरीके से आयोजन नहीं करवा पायी है. सरकार द्वारा आयोजित हर परीक्षा विवादित हो जाती है. राज्य में परीक्षा माफिया सक्रिय हैं. पेपर लीक से युवा परेशान हैं. जेएसएससी सीजीएल के अंतिम परिणाम का प्रकाशन सरकार नहीं कर पा रही है. क्योंकि सरकार की सीआईडी जाँच में विलंब हो रहा है.
15 हजार से अधिक सहायक आचार्य का पद खाली
सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में 15,409 पद खाली रह गए हैं. सरकार ने सभी 26,001 पदों के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन नहीं किया है. अभ्यर्थियों ने रॉ मार्क्स के आधार पर मेघा सूची जारी करने की माँग की है. नॉर्मलाइजेशन की पद्धति पर अभ्यर्थियों ने सवाल खड़े किए हैं. सरकार को अभ्यर्थियों की माँगों को सुनना चाहिए.
उत्पाद सिपाही दौड़ में 17 युवाओं की मौत, नौकरी का पता नहीं
उत्पाद सिपाही की भर्ती के नाम पर सरकार ने युवाओं को दौड़ा दिया. जिसमें 17 नौजवानों की मौत हो गयी. उत्पाद सिपाही की भर्ती कब पूरी होगी आज तक इस विषय को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है.
1 लाख 58 हज़ार 846 पद खाली, 2 लाख 7 हज़ार स्वीकृत पद हो गए समाप्त
सरकार ने अपने वादे में कहा था कि हम संविदा और अनुबंध शब्द को समाप्त करते हुए सरकारी नौकरी देंगे. यह सरकार सरकारी नौकरी, संविदा/अनुबंध आधारित रोजगार, निजी क्षेत्र में नौकरियां, निजी क्षेत्र एवं आउटसोर्सिंग में आरक्षण प्रदान करने में पूरी तरह विफल रही है. सरकार अपने वादे पूरे करने में फेल हो गयी है. युवाओं को नौकरी न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का वादा भी झूठा निकला है.
श्री मेहता ने आंकड़ों के साथ सरकार की पोल खोलते हुए कहा, “मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 तक सरकारी विभागों में 1 लाख से अधिक रिक्त पदों को भरने का भरोसा दिलाया था, लेकिन पिछले दो वर्षों में 2.07 लाख से अधिक स्वीकृत पद समाप्त हो गए. यह युवाओं के साथ धोखा है.” 2025 में अब तक सरकार नौकरी के नाम पर ठगती रही है. सरकार स्वीकृत पदों को घटा रही है.
स्वीकृत पदों में भारी कमी, शिक्षा विभाग का हाल
वित्त विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 में विभिन्न सरकारी विभागों में स्वीकृत पदों की संख्या 5,33,737 थी. जो 2024-25 में घटकर 3,26,049 रह गई. इस प्रकार, मात्र दो वर्षों में 2,07,688 स्वीकृत पद समाप्त हो गए. मुख्य रूप से शिक्षा और गृह विभाग प्रभावित हुए. इससे शिक्षा और क़ानून व्यवस्था के प्रति सरकार की उदासीनता प्रदर्शित होती है.
पदों को लेकर सबसे ज़्यादा कटौती शिक्षा विभाग में हुई. प्राथमिक शिक्षा में 2022-23 में 1,81,706 पद थे. इसे 2024-25 में 65,187 पद कर दिया गया. 1,16,519 पद कम कर दिए गए. माध्यमिक शिक्षा में 2022-23 में 82,841 पद थे. 2024-25 में 17,137 पद कर दिया गया. इस तरह 65,704 पद कम कर दिए गए. कुल शिक्षा विभाग में 1,82,223 पद कम कर दिए गए.
गृह विभाग में कमी
2022-23 में 1,39,734 पद → 2024-25 में 1,00,192 पद (कमी: 39,542 पद). पुलिस सेवा में 39 हजार से अधिक पद कम हुए. सरकार लगातार पदों को कम कर रही है.
रिक्त पदों की स्थिति:
1. 2022-23: कुल स्वीकृत पद 5,33,737 में से 3,50,721 रिक्त (कार्यरत: 1,83,016).
2. 2023-24: कुल स्वीकृत पद 4,66,494 में से 2,87,129 रिक्त (कार्यरत: 1,79,365).
3. 2024-25: कुल स्वीकृत पद 3,26,049 में से 1,58,846 रिक्त (कार्यरत: 1,67,203). अब राज्यभर में सिर ्फ 1.59 लाख पद ही खाली हैं.
हमारी माँग है कि सरकार ख़ाली पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द पूर्ण करे. सरकार वादा करके भूल जाती है. युवा परेशान हैं.
ओबीसी आरक्षण का नहीं हो रहा पालन
सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण अब तक नहीं दिया है. निजी क्षेत्र में और आउटसोर्सिंग में 75 प्रतिशत आरक्षण का नियम कागजों में दबकर रह गया है. सरकार ने सहायक पुलिसकर्मियों का अनुबंध सिर्फ एक साल बढ़ाया है. सरकार इन्हें स्थायी नियुक्ति देकर समायोजित करे. इन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन दे.
तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरी में शत- प्रतिशत आरक्षण स्थानीय झारखंडी को मिले. सरकार ने खतियान के आधार पर स्थानीयता को परिभाषित करने का वादा किया था उस वादे का भी कुछ नहीं हो पाया.
अनुबंध कर्मियों को नियमित नहीं कर पायी सरकार
राज्य सरकार के कार्यालयों में करीब 1 लाख 60 हज़ार ऐसे कर्मचारी हैं जो या तो संविदा पर हैं या दैनिक भत्ता या आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे हैं. इनकी सेवा सचिवालय से लेकर प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर स्थित सरकारी कार्यालय में ली जाती है. इन नियुक्तियों में आरक्षण रोस्टर का पालन हुआ है या नहीं सरकार इसको स्पष्ट करे. क्योंकि निजी क्षेत्र की आउटसोर्सिंग कंपनी आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं करती है. इस मामले में सरकार आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए अनुबंध कर्मियों को स्थाई करे.











