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विधायक दल के नेता को लेकर भाजपा-कांग्रेस असमंजस में, जातीय समीकरण साधने में जुटे दोनों दल

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 10 दिस॰ 2024
  • 2 मिनट पठन


TVT NEWS DESK

रांची ( RANCHI) : छठा झारखंड विधानसभा के गठन हो गया है, सभी विधायक शपथ ले चुके हैं, स्पीकर का नाम भी तय हो चुका है. लेकिन अभी तक विपक्षी दल के नेता के रूप में किसी का नाम तय नहीं हो पाया है, विपक्ष में सबसे बड़े दल होने के नाते भाजपा को विपक्षी दल का नेता चुनना है, लेकिन पहले सत्र में भाजपा ने किसी के नाम की घोषणा नहीं की गई. इसी तरह कांग्रेस भी अपने विधायक दल के नेता के रूप में किसी का नाम की घोषणा नहीं कर पाई.




कांग्रेस में विधायक दल के नेता के रूप में दो बड़े दावेदार

पिछली बार हेमंत सरकार के दौरान कांग्रेस के विधायक दल के नेता आलमगीर आलम थे, लेकिन जेल जाने के बाद उनका मंत्री पद और विधायक दल नेता का पद भी चला गया. इरफान अंसारी को उनकी जगह मंत्री बना दिया गया और वरीयता के कारण रामेश्वर उरावं को विधायक दल का नेता बना दिया गया. लेकिन इस बार कांग्रेस के दो विधायक सबसे अधिक इस पद के दावेदार हैं. रामेश्वर उरावं और प्रदीप यादव को सबसे अधिक दावा बताया जा रहा है. प्रदीप यादव को मंत्री बनाने की चर्चा थी, लेकिन उनका नाम कट गया, इसलिए अब विधायक दल के नेता के रूप में उनके नाम की चर्चा है. लेकिन एक समस्या है यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पिछड़ा वर्ग कोटे से कमलेश कुमार कमलेश पहले से ही है, ऐसे में उनका पत्ता यहां भी कट सकता है और उनकी जगह रामेश्वर उरांव को मौका मिल सकता है. तीसरे नाम की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है.




  

 

भाजपा में विपक्षी दल के नेता के लिए कई दावेदार

पिछले विधानसभा में तीन साल से अधिक समय तक विपक्षी दल के नेता का पद खाली रहा, भाजपा ने बाबूलाल मरांडी को विपक्षी दल के नेता के रूप में आगे जरूर किया, लेकिन हेमंत सरकार ने तकनीकि रूप से उन्हें विपक्षी नेता के रूप में मान्यता देने से इंकार कर दिया. बाद में बाबूलाल को प्रदेश अध्यक्ष बना कर भाजपा ने अमर बाउरी को विपक्षी दल के नेता बनाया. इस बार भी भाजपा में पेंच कुछ इसी तरह फंसा है. बाबूलाल मरांडी, चंपई सोरेन और सीपी सिंह तीन बड़े नेता जीत कर आएं हैं. बाबूलाल प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं, इस हालात में उन्हें विपक्षी दल के नेता बनाया जाएगा, उम्मीद कम है. झामुमो से भाजपा में शामिल हुए पूर्व सीएम चंपई सोरेन भाजपा के टिकट पर जीत कर आएं हैं, इसलिए उनका नाम पर भाजपा कितना तैयार होगी, कहना मुश्किल है, वहीं सीपी सिंह लगातार सातवीं बार चुनाव जीत आएं है और पहले ही दिन सीपी सिंह ने घोषणा किया कि अब वे चुनाव नहीं लडेंगे, यानि यह उनका अंतिम विधानसभा है. इनके आलावा कई युवा चेहरे भी हैं, जिनमें राज सिंहा, नीरा यादव और शशिभूषण मेहता जैसे कई तेज तर्रार नेता है.




  

 

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