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BREAKING : आधार व राशन कार्ड नागरिकता का सबूत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों ऐसा कहा, जानिए खबर में

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 12 अग॰ 2025
  • 2 मिनट पठन


रांची डेस्क

रांची ( RANCHI ) : स्पेशन इंसेंटिव रिवीजन ( SIR) यानि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम  को लेकर इस समय देश में दो मोर्चे पर लड़ाई जारी है. विपक्ष सड़क से सदन तक और कोर्ट दोनों जगहों पर जंग लड़ रहा है. इस मुद्दे पर विपक्ष केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर पूरी तरह हमलावर है. और कोर्ट में कई याचिकाएं भी दाखिल कर रखा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई और बुधवार को जारी रहेगी.



आधार और राशन कार्ड निवास का सबूत नहीं  

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए माना कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं हो सकता है. कोर्ट ने माना कि बिहार में काफी लोगों के पास नागरिकता के दस्तावेज नहीं थे. जस्टिस कांत ने कहा कि यह कहना गलत है कि बिहार में किसी के पास भी वैध दस्तावेज नहीं हैं. उन्होंने माना कि आधार और राशन कार्ड मौजूद हैं, लेकिन उन्हें निवास का पक्का प्रमाण नहीं माना जा सकता है.

विपक्ष के तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिघवी ने कहा कि आयोग आधार कार्ड और राशन कार्ड को नहीं स्वीकार कर रहे हैं. तब कोर्ट ने दोनों की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि नागरिकता का सबूत देने के लिए कुछ दस्तावेज तो देना ही पड़ेगा, यह कहना आसान है कि दस्तावेज नहीं है. चुनाव आयोग का यह कहना सही है कि कि केवल आधार कार्ड को नागरिकता का एकमात्र सबूत नहीं माना जा सकता है.  

वोटर लिस्ट अवैध हुआ तो पूरी प्रक्रिया होगी रद्द

विपक्ष के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पाई गई तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है. गौर तलब है कि 30 सितंबर को फाइनल सूची चुनाव आयोग जारी करेगा. सके पहले किसी तरह की गड़बड़ी को ठीक किया जा सकता है. .

 

 

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