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BREAKING : रूस से भारत नहीं खरीदेगा तेल, ट्रंप के दावे में कितना दम ? ना सीजफायर, ना ही डील, ट्रंप-पुतिन के बीच क्यों नहीं बनीं सहमति ?

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 16 अग॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

 

 

रांची डेस्क

रांची ( RANCHI ) : अमेरिका के अलास्का में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक बंद कमरे में लगभग तीन घंटे तक बातचीत हुई, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. दोनों राष्ट्रपति किसी अंतिम समझौता तक नहीं पहुंच सकें. अमेरिका और रूस के राष्ट्रपति ना तो रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर कोई अंतिम निर्णय कर सकें और ना ही अमेरिका के टैरिफ वार पर कोई फाइनल डील कर सकें.

 मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने 12 मिनट का एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस किया, जिसमें उम्मीद जताया कि जल्द समाधान निकलेगा. जिसके बाद दोनों नेता अलास्का से बाहर निकल गये. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि मुझे लगता है कि हमारी बैठक बहुत सकारात्मक रही. हमने कई बिंदुओं पर सहमति जताई, लेकिन कोई डील नहीं हुई. कोई समझौता तभी होगा जब वह अंतिम रूप लेगा. वहीं रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि उनके लिए रूस की सुरक्षा सबसे जरूरी है. उन्होंने अगली मीटिंग मॉस्को में करने का सुझाव दिया. अपनी बात कहने के बाद दोनों नेता मंच से तुरंत चले गए.


ट्रंप का दावा – भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा

पुतिन के साथ बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि "रूस ने अपने तेल के एक बड़े ग्राहक को खो दिया है, जो भारत है. भारत रूसी तेल व्यापार का 40% हिस्सा संभाल रहा था. अगर मैं अब सेकेंड्री प्रतिबंध लगाता हूं, तो यह उनके लिए विनाशकारी होगा." लेकिन ट्रंप के दावे के विपरीत भारत ने रूसी तेल का आयात बंद नहीं किया है. भारत अभी भी रूसी तेल खरीद रहा है और पुतिन के साथ बैठक से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर बैठक बेनतीजा रही, तो भारत पर टैरिफ और बढ़ाया जाएगा.

रूस से तेल खरीद पर रोक नहीं – भारत

लेकिन ट्रंप के दावे के विपरीत भारत ने रूसी तेल का आयात बंद नहीं किया है. भारत अभी भी रूसी तेल खरीद रहा है. ट्रंप के दावों के बावजूद भारत ने पनी नीति साफ करते हे कहा कि उसकी तेल खरीद पूरी तरह आर्थिक आधार पर तय होती है और रूस से तेल आयात पर की रोक नहीं लगी है. इंडियन ऑयल के चेयरमैन का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रख कर ही ते खरीदता है. दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय ने भी साफ कर दिया है कि भारत पर लगाए जाने वाला अमेरिका का टैरिफ अनुचित और एकतरफा है.   

 

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