
सीएच स्कूल एनसीसी के 75 वर्ष के इतिहास में रचा नया कीर्तिमान, शिक्षिका राधिका बनीं पहली महिला लेफ्टिनेंट
24 दिस. 2025
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अमित कुमार
कोडरमा ( KODERMA) : वर्ष 2025 देश में महिलाओं और बालिकाओं की उपलब्धि का साल रहा है, वही वर्ष के अंत में कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया शहर स्थित सी.एच.स्कूल के लिए बुधवार का दिन अभिमान और गौरव का ऐतिहासिक क्षण बन गया. जहां विद्यालय की जीव विज्ञान विषय की शिक्षिका राधिका ने एनसीसी प्रशिक्षण अकादमी, ग्वालियर से 75 दिनों का कठोर एवं अनुशासित प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेफ्टिनेंट का पद प्राप्त किया है. प्रशिक्षण उपरांत विद्यालय पहुँचने पर एनसीसी कैडेट्स, विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया.
बताते चलें एनसीसी के 75 वर्षों के इतिहास में सी.एच.स्कूल की शिक्षिका लेफ्टिनेंट राधिका पहली महिला एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर (एएनओ) बनी हैं, जिन्होंने यह प्रतिष्ठित प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इससे पहले इस विद्यालय से केवल पुरुष शिक्षक ही एनसीसी का यह विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर सके थे. लेफ्टिनेंट राधिका की यह उपलब्धि न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे कोडरमा जिले के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है.
इस अवसर पर विद्यालय परिसर में आयोजित स्वागत कार्यक्रम के दौरान एनसीसी कैडेट्स में विशेष उत्साह देखने को मिला. कैडेट्स ने अनुशासनबद्ध तरीके से परेड कर लेफ्टिनेंट राधिका को सम्मान दिया. विद्यालय प्रशासन ने इसे छात्रों के लिए प्रेरक उपलब्धि बताया.
लेफ्टिनेंट राधिका ने अपनी इस सफलता का श्रेय 45 झारखंड बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर विजय कुमार (सेना मेडल) को दिया. उन्होंने कहा कि कमांडिंग ऑफिसर द्वारा मिले निरंतर मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और विश्वास के कारण ही वे इस कठिन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर सकीं.
प्रशिक्षण के अनुभव साझा करते हुए लेफ्टिनेंट राधिका ने बताया कि एनसीसी प्रशिक्षण अकादमी, ग्वालियर में बिताए गए 75 दिन अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहे, जहाँ शारीरिक दक्षता, मानसिक मजबूती, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन पर विशेष बल दिया गया. उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण एनसीसी कैडेट्स के सर्वांगीण विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा तथा इससे कैडेट्स को सेना, अर्धसैनिक बलों एवं अन्य सेवाओं के लिए तैयार करने में बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा.
विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों ने लेफ्ट िनेंट राधिका को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि छात्र-छात्राओं, विशेषकर बालिकाओं के लिए प्रेरणा का कार्य करेगी और एनसीसी के प्रति युवा बालिकाओं की रुचि को और अधिक बढ़ाएगी.











