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EXCLUSIVE : तेजस्वी की मेहनत पर राहुल फेर रहे पानी ! क्यों बुलाया स्टालिन-रेड्डी को, कांग्रेस का क्या है हिडेन एजेंड़ा ? पढ़िए खास खबर

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 30 अग॰ 2025
  • 3 मिनट पठन

 

उपेंद्र गुप्ता


पटना ( PATNA) : बिहार के विधानसभा चुनाव के पहले से ही जिस तरह तेजस्वी यादव सीएम नीतीश कुमार को चुनौती दे रहे थे और अपनी पकड़ जनता के बीच मजबूत बना रहे थे, उस पर लगता है कि राहुल गांधी ने पानी फेर दिया है. जिस तरह पीएम मोदी की दिवगंत मां के प्रति गाली दी गई, उसे बिहार ही नहीं पूरे देश में शायद ही कोई स्वीकार करेगा, यहां तक कि खुद राहुल और उनकी पार्टी के लिए भी जवाब देना मुश्किल हो गया है. तेजस्वी और राजद ने पहले ही चुप्पी साध ली है. इतना ही नहीं राहुल जिस तरह नफरत की भाषा में पीएम मोदी को तू-ताम कह रहे हैं, उसे भी कोई सही नहीं ठहराएगा.

 


बिहार में राहुल-कांग्रेस को खोने के लिए कुछ नहीं  


राहुल गांधी जिस तरह वोटर अधिकार यात्रा में बोल रहे हैं उसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं हैं. कांग्रेस अच्छी तरह जानती है कि बिहार में पिछली बार 19 सीटें मिलीं थीं, इस बार कुछ कम या ज्यादा हो सकती है. कांग्रेस किसी भी सूरत में बिहार में अपने बूते ना तो सरकार बना सकती है और ना ही किसी की सरकार बनाने में मदद कर सकती है. इसलिए राहुल वैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं कि दांव लगा तो ठीक, नहीं लगा तो भी ठीक.

 

मुस्लिम-ओबीसी वोटरों पर नजर कांग्रेस का हिडेन एजेंडा


मौजूदा समय में बिहार के मुस्लिम और यादव के साथ कुछ हद तक दलित और ओबीसी का क बड़ा वर्ग भी राजद के साथ हैं. इसलिए राजद नेता तेजस्वी सीएम नीतीश कुमार को सीधी चुनौती दे रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के पास कोई वर्ग साथ में नहीं है और वह पूरी तरह से राजद पर निर्भर है. यहीं कांग्रेस को चुभ रहा है, क्योंकि ये वोटर तो कभी उनके ही थे और अब कांग्रेस चाहती है कि मुस्लिम ,दलित और ओबीसी वोटर्स उनके साथ जुड़ जाएं. लेकिन राजद के कमजोर किए बिना यह संभव ही नहीं है. कांग्रेस अच्छी तरह जानती है कि पुराने दौर की वापसी के लिए क्षेत्रीय दलों का कमजोर होना जरूरी है, इसलिए आम आदमी पार्टी हो, या राजद या समाजवादी पार्टी या फिर टीएमसी सभी के सकमजोर हुए बिना उनकी वापसी होना मुश्किल है. ये सभी पार्टियां कांग्रेस के वोटरों पर कब्जा जमा कर रखी हुई है. इसलिए इनका कमजोर होना कांग्रेस के लिए चुनाव जीतने जैसा है और कांग्रेस का यहीं हिडेन एजेंड़ा है.  


बिहार चुनाव में राहुल सेट कर रहे एजेंड़ा ?


बिहार में मतदाता अधिकार यात्रा में तेजस्वी और राहुल गांधी ने मिल कर शुरू की. मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा राजनीतिक दृष्टिकोण से सही कहा जा सकता है. लेकिन इस मुद्दे की राहुल गांधी ने ही हवा निकाल दी. मुद्दे को गाली-गलौज और तू-ताम में तो बदला ही, यहां तक कि तमिलनाडू के सीएम स्टालिन और तेलगांना के सीएम रेवंत रेड्डी को वोटर अधिकार यात्रा में आमंत्रित कर बिहारियों के जख्म पर नमक छिड़क दिया. अगर बिहारी अस्मिता से ये सब मुद्दे जुड़े तो राहुल को तो नहीं तेजस्वी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. उनका सीएम बनने का सपना टुट सकता है.


राहुल ने तेजस्वी के सीएम बनाने की नहीं की घोषणा


मतदाता अधिकार यात्रा में तेजस्वी यादव ने खुले मंच से राहुल गांधी को देश का पीएम कैंडिडेट बताया, लेकिन राहुल गांधी ने एक बार भी सीएम कैंडिडेट नहीं बताया. यहां तक कि मीडिया के सवाल को भी वे टाल गए. जिससे साफ है कि राहुल गांधी इंडी गठबंधन के नाव पर तो सवार है, सहयोगी दलों को मजबूत करने के बजाय कांग्रेस को मजबूत करना चाहते हैं.     

 

 

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