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बिहार में घोखे-अपमान का कैसे बदला लेगी झामुमो ? राजद को बाहर,कांग्रेस में टूट या तीसरा मोर्चा, जानिए आंकड़ों से

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 6 नव॰ 2025
  • 4 मिनट पठन

न्यूज डेस्क

रांची ( RANCHI) : बिहार में विधानसभा चुनाव और झारखंड में घाटशिला उपचुनाव के बाद यानि 14 नवबंर के बाद झारखंड की राजनीतिक खासकर इंडी गठबंधन के माहौल में बदलाव देखने को मिल सकता है. बिहार विधानसभा चुनाव में राजद-कांग्रेस ने जिस तरह झामुमो के साथ सियासी साजिश करते हुए नामांकन के अंतिम दिन समय सीमा खत्म होने तक धोखे में रखा, उससे झामुमो ना सिर्फ आहत है, बल्कि इसे अपनी राजनीतिक अस्मिता को अपमान से जोड़ते हुए राज्य में राजद और कांग्रेस के साथ नए सिरे से गठबंधन में संबंध जारी रखने के लिए समीक्षा करने की चेतावनी दे दी है. माना जा रहा है तेजस्वी यादव के फैसले से आहत झामुमो सरकार से राजद को बाहर का रास्ता दिखा सकती है. वहीं कांग्रेस पर भी राजनीतिक दवाब बना सकती है.     

झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के समीकरणों पर असर

बिहार में जिस तरह इंडी गठबंधन में झामुमो को पूरी तरह बाहर रखा गया, उसका झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है. झामुमो ने संकेत दिए हैं कि बिहार चुनाव के बाद गठबंधन की समीक्षा की जाएगी. पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिहार में जो हुआ, उस पर विचार जरूरी है.हेमंत सरकार में मंत्री झामुमो के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार ने भी संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी झारखंड में कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन की समीक्षा करेगी और इस 'अपमान' का करारा जवाब देगी.

हेमंत सोरेन कर सकते हैं अपने मंत्रिमंडल में बदलाव

इन दोनों नेताओं के बयान से राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकते हैं. ऐसी अटकलें हैं कि हेमंत मंत्रिमंडल से राजद कोटे के मंत्री संजय प्रसाद यादव को बाहर कर सकते हैं. बिहार में हुए इस “धोखे” के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. 14 नवबंर तक मतगणना का लोग इंतजार कर रहे हैं, उसके बाद सबकी निगाहें झामुमो के नेताओं पर टिकी जाएगी.

झामुमो खोज रहा विकल्प, पार्टी में टूट संभव- प्रदीप बालमुचू

घाटशिला उपचुनाव के बाद इंडी गठबंधन में बड़े बदलाव होना तय है, इसके संकेत कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचू के बयान मिलता है. कांग्रेस नेता बालमुचू कहा कि झामुमो कांग्रेस के अलावा विकल्प खोज रहा है और इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि जरूरत पड़ने पर पार्टी में टूट हो जाए. दरअसल, बलमुचू घाटशिला से चुनाव लड़ना चाहते थे, वे घाटशिला से तीन बार विधायक रह चुके हैं, उन्होंने टिकट के लिए काफी प्रयास भी किए,लेकिन कांग्रेस ने यह सीट झामुमो के लिए छोड़ दी. जिससे कांग्रेस के नेता नाराज हैं.

वित्त मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के बयान से भी विवाद

प्रदीप बालमुचू के आलावा वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के बयान से सरकार काफी नाराज है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सीएम हेमंत सोरेन को एक चिट्ठी लिखी. इसमें उन्होंने साफ लिखा कि राज्य में हरिजन की आबादी 50 लाख से अधिक है, लेकिन उनके हालात आदिवासियों से भी बदतर है. उन्होंने इनके लिए अनुसूचित जनजाति आयोग के गठन की मांग भी की. वित्त मंत्री इस मुद्दे पर कई माह से काफी मुखर रहे हैं. लेकिन घाटशिला चुनाव से पहले वित्त मंत्री का यह बयान सरकार को असहज कर गया. दूसरी तरफ स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के बयान से विवाद होता रहा है. एक बार तो झामुमो कोटे के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से भी इरफान अंसारी भिड़ गए थे और जमकर बहस की. जिससे झामुमो को काफी नागवार लगा था.

पोस्टर से गठबंधन में मचा तूफान

इसी साल जून में झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने एक बैनर टांग दिया. इस बैनर पर साफ लिखा था, "गुरुजी हैं तो गुरूर है, हेमंत है तो हिम्मत है, बसंत है तो बहार है, इसलिए ही तो जेएमएम की सरकार है." यहां गुरुजी का मतलब शिबू सोरेन, हेमंत से हेमंत सोरेन और बसंत से हेमंत के भाई बसंत सोरेन से है. इस पोस्टर के लगते ही गठबंधन में तूफान मच गया. कांग्रेस-राजद के नेताओं ने आपत्ति दर्ज की, कांग्रेस-राजद का कहना था कि सरकार झामुमो की नहीं, इंडी गठबंधन की है.

राजद से टूटा नाता,तो हेमंत सरकार पर नहीं पड़ेगा असर

झारखंड विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 81 है. बहुमत के लिए 41 विधायक का होना जरुरी है. झामुमो के कुल 34 विधायक हैं. इसके अलावा कांग्रेस के 16 , राजद के 04 और भाकपा-माले के 02 विधायक हैं. शेष 25 सीटों में भाजपा- 21, जदयू- 01, लोजपा(आर)- 01, आजसू- 01 और जेएलकेएम का 01 विधायक है. अर्थात सत्ताधारी दल के पास कुल 56 विधायक है. जो बहुमत से 15 सीट  ज्यादा है. अगर इस गठबंधन से राजद को बाहर किया जाता है,तो भी सरकार के पास विधायकों की कुल संख्या 52 रहेगी, जो बहुमत से 11 सीटें ज्यादा है. मतलब, सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

हेमंत सरकार में सीएम समेत कुल 12 मंत्री शामिल हैं.झामुमो की ओर से सीएम के अलावा 05 मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपक बिरुआ, चमरा लिंडा, हफीजुल हसन, योगेंद्र प्रसाद शामिल हैं. रामदास सोरेन के असमय निधन की वजह से झामुमो की एक सीट खाली है. दूसरी तरफ शेष पांच सीटों में 04 सीटों पर कांग्रेस के मंत्री के रुप में राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह, नेहा शिल्पी तिर्की और इरफान अंसारी शामिल है. वहीं राजद के संजय प्रसाद यादव को भी जगह मिली है. अगर झारखंड में राजद से नाता तोड़ा जाता है तो हेमंत कैबिनेट में मंत्रियों की कुल संख्या 10 से घटकर 09 हो जाएगी.

चुनाव नतीजे पर निर्भर करेगा झामुमो का फैसला

बिहार में विधानसभा चुनाव और घाटशिला उप चुनाव के नतीजे 14 नवबंर को आएंगे, उसके बाद ही झामुमो की फैसला लेगी. यदि बिहार में तेजस्वी की सरकार नहीं बनी, तो झामुमो फैसला लेने में कोई देरी नहीं करेगी. तब राजद का बाहर होना तय है. और घाटशिला में झामुमो उपचुनाव जीत जाती है तो फिर झामुमो तीसरे विकल्प पर भी फैसला लेने में भी कोई देरी नहीं करेगी. जिसका जिक्र कांग्रेस नेता प्रदीप बालमुचू भी कर रहे हैं, यानि कांग्रेस में टूट से इंकार नहीं किया जा सकता.     

 

 

 

 

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