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तेजस्वी यादव नहीं जाते कोर्ट, तो आज मां राबड़ी देवी का नहीं छीनता सरकारी आवास, जानिए क्यों गए थे कोर्ट ?   

26 नव. 2025

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न्यूज डेस्क

पटना ( PATNA) : बिहार में नीतीश कुमार की नई सरकार के गठन के साथ ही पूर्व सीएम लालू-राबड़ी परिवार से बंगले छीन लिया गया है. पहले राबड़ी देवी का आवास 10 सर्कुलर स्थित बंगले को खाली करने का आदेश आया. जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी पूरे परिवार के साथ रहती है. फिर राबड़ी देवी के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता पार्टी के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव से भी बंगला छीन लिया गया है. राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता विपक्ष की हैसियत में नई सरकार ने 39 हार्डिंग रोड का नया आवास आबंटित किया है. जबकि बड़े बेटे तेजप्रताप के विधानसभा चुनाव हार जाने के कारण उन्हें अब विधायक आवास खाली करना पड़ेगा.


 2006 से 10 सर्कुलर रोड आवास में रह रहा था लालू-राबड़ी परिवार

बिहार सरकार का यह आदेश लालू परिवार के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि लालू परिवार लंबे समय से इस आवास में रह रहे थे. 2005 में राज्य में नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद 16 जनवरी 2006 को इस आवास में लालू परिवार की एंट्री हुई थी, जो आज तक नहीं बदल पाया था. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास में ही पूर्व सीएम लालू यादव भी रहते हैं. चुनाव नतीजों के बाद हार को लेकर इसी बंगले में तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्या के बीच लड़ाई हुई थी. इसी आवास से पहले बहू ऐश्वर्या राय बाहर हुई, फिर तेजप्रताप और खुद अब लालू-राबड़ी बाहर हो रहे हैं.

नीतीश सरकार पर राजद का आरोप

राष्ट्रीय जनता दल ने राबड़ी देवी का आवास बदलने के आदेश को सरकार द्वारा बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है. पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि यह सरकार में भाजपा के बढ़ते दखल का परिणाम है और उसके कारण ही यह आदेश जारी हुआ है. लेकिन सच कुछ और ही है.

नीतीश सरकार ने ही सभी पूर्व सीएम को दी थी सरकारी आवास की सुविधा

नीतीश सरकार ने 2010 में कानून बदलकर बिहार के सभी पूर्व सीएम को आवास, सुरक्षा और तमाम सुविधाएं सरकारी खर्च पर दी थी. इसके तहत राबड़ी देवी, लालू यादव, जीतनराम मांझी, जगन्नाथ मिश्रा और सतीश प्रसाद सिंह को बंगले आवंटित हुए थे. 10 सर्कुलर वाला बंगला राबड़ी देवी को पूर्व सीएम के तौर पर ही आबंटित कर दिया गया था, जिसमें वे 2006 से रह रही थी. राबड़ी का यह आवास बतौर पूर्व सीएम उनके पास ही रह सकता था, लेकिन उनके बेटे तेजस्वी यादव द्वारा डिप्टी सीएम आवास को लेकर दायर एक केस की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था. जिसके जरिए राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को पटना में आवास, सुरक्षा और तमाम सुविधाएं सरकारी खर्च पर दी जा रही थीं.

 तेजस्वी यादव कोर्ट नहीं जाते, तो नहीं बदलता पुराना कानून

2017 में सीएम नीतीश कुमार ने जब पलटी मारते हुए राष्ट्रीय जनता दल से अलग हो गए और भारतीय जनता पार्टी के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बना ली, तब सरकार ने तेजस्वी को 5, देशरत्न मार्ग का वह बंगला खाली करने कहा, जो उन्हें बतौर डिप्टी सीएम आवंटित हुआ था. तेजस्वी ने उस बंगले की साज-सजावट पर काफी खर्च करवाया था, इसलिए वो विधानसभा में नेता विपक्ष के तौर पर वहीं रहना चाहते थे. इसलिए तेजस्वी यादव भवन निर्माण विभाग के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट चले गये. हाईकोर्ट में सिंगल जज ने तेजस्वी का याचिका खारिज कर दी तो उन्होंने अपील दायर की. अपील की सुनवाई तत्कालीन चीफ जस्टिस एपी शाही और जस्टिस अंजना मिश्रा की बेंच ने की.

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने सरकार के पुराने नियम को ही रद्द कर दिया  

कोर्ट के सवालों के जवाब में भवन निर्माण विभाग ने जो दस्तावेज पेश किए, उससे कोर्ट को पता चला कि बिहार के सारे पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी खर्चे पर आजीवन बंगला, सुरक्षा, स्टाफ और दूसरी सुविधाओं की एक योजना चल रही है. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने तेजस्वी की अपील तो खारिज की ही, साथ में पूर्व सीएम को आजीवन आवास और अन्यं सुविधाओं के मामले को स्वतः संज्ञान लेकर सरकार से जवाब देने कहा.

इसी मामले में 19 फरवरी 2019 को कोर्ट ने इस तरह के प्रावधान वाले कानून और सर्कुलर को रद्द करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते आवंटित सरकारी आवास और सुविधाएं वापस लेने का आदेश दिया था. अगर हाईकोर्ट ने यह सुविधा बंद नहीं की होती और राबड़ी को यह आवास बतौर पूर्व सीएम आवंटित रहा होता तो शायद इसमें बदलाव नहीं होता.

26 नव. 2025

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