सीने में है जलन तो सिर्फ पाचन विकार ना समझें, बार-बार जलन होना कैंसर का है संकेत, तत्काल कराएं इलाज
- Upendra Gupta
- 14 सित॰ 2025
- 2 मिनट पठन

न्यूज डेस्क
रांची ( RANCHI) : आमतौर पर हमलोग सीने में जलन होने पर उसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते हैं, ऐसा मान लेते है कि भोजन के अपच होने के कारण सीने में जलन हो रही है. परन्तु यह शत-प्रतिशत सही नहीं हो सकता है. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुमान के अनुसार, 2025 में एसोफैजियल कैंसर के लगभग 22,070 नए मामलों का निदान किया गया और इस बीमारी से 16,250 मौतें हुईं. एसोफैजियल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें कैंसर कोशिकाएं एसोफैजियल कैंसर (GERD) के ऊतकों में बनती हैं, जो गले को पेट से जोड़ने वाली नली है.
क्या है एसोफैजियल कैंसर
ग्रासनली (esophagus) में होने वाला कैंसर दो तरह का होता है. पहला है एडेनोकार्सिनोमा, जो ग्रासनली की ग्रंथि वाली कोशिकाओं से शुरू होता है. दूसरा है स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, जो ग्रासनली की अंदरूनी परत (लाइनिंग) की कोशिकाओं में शुरू होता है.
अब एक डॉक्टर ने बताया है कि अमेरिका में इस कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं और लोगों को इसके जोखिम और लक्षण के बारे में सतर्क रहना चाहिए.
क्या कहते हैं डॉक्टर
एक खास तरह का ग्रासनली कैंसर, जिसे "एडेनोकार्सिनोमा" कहा जाता है, अमेरिका में तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा संबंध जीईआरडी (GERD) यानी गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिज़ीज़ से है, जिसे आम भाषा में एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है. एक डॉक्टर ने बताया कि एनसीआई (NCI) के आंकड़ों के अनुसार 45 से 64 साल की उम्र के लोगों में 2012 से 2019 के बीच ग्रासनली कैंसर के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं.
क्या संबंध है जीईआरडी का ग्रासनली कैंसर से
डॉक्टर के अनुसार, सीने में जलन और जीईआरडी एक जैसे नहीं हैं, लेकिन यह इसका एक लक्षण जरूर है. जीईआरडी का मतलब गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज है, जो एक पुराना पाचन विकार है, जिसमें पेट का एसिड वापस ग्रासनली में चला जाता है जिससे सीने में जलन और उल्टी होती है.
हफ्ते में दो से ज्यादा बार जलन हो तो दिखाएं डॉक्टर को इसलिए जिन लोगों को लंबे समय से हफ़्ते में दो बार से ज़्यादा सीने में जलन की समस्या है, उन्हें गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जाँच करवाना ज़रूरी है. लंबे समय तक एसिड के संपर्क में रहने से ग्रासनली को नुकसान पहुँच सकता है जिससे बैरेट्स ग्रासनली नामक एक पूर्व-कैंसर स्थिति पैदा हो सकती है, जो अगर निगरानी में न रखी जाए तो ग्रासनली के कैंसर में बदल सकती है. कैंसर मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जीईआरडी ग्रासनली के कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है.
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