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चिंता,उदासी,भय,परेशानी से गुजर रहे हैं, तो सच्चे दिल से कीजिए मां कूष्मांडा की करें आराधना, जल्द मिलेगी राहत  

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 25 सित॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

न्यूज डेस्क

रांची ( RANCHI) : नवरात्र के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा से जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. माना जाता है कि इस दिन जो लोग चिंता, उदासी, भय या पछतावे से गुजर रहे हों, वे मां कूष्माण्डा की पूजा करके राहत पा सकते हैं.

 

मां कूष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं, जिनके हाथों में विभिन्न दिव्य आयुध और जपमाला सुशोभित है. इनका वाहन सिंह है. इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है, जिससे इनका कूष्मांडा नाम पड़ गया. सूर्यलोक में निवास करने वाली यह देवी अपने तेज से संपूर्ण ब्रह्मांड को आलोकित करती हैं.


नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना को समर्पित है. शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक देवी कूष्मांडा का स्वरूप अष्टभुजी है, जिनके हाथों में विभिन्न दिव्य आयुध और अमृत कलश शोभायमान हैं.

मान्यता है कि सच्चे भाव से मां की आराधना करने पर जीवन से अंधकार व नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है. इस दिन विधि-विधान से पूजन और आरती करने से मां कूष्मांडा अति प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. साथ ही, उनके प्रभावशाली मंत्रों का जप करने से मानसिक शांति और जीवन में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं. 

नवरात्रि के चौथे दिन इनकी उपासना रोग, शोक और बाधाओं का नाश करती है. आयु, बल, यश और आरोग्य प्रदान करती है. मां कूष्मांडा अत्यल्प भक्ति और सेवा से भी प्रसन्न होकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. सच्चे मन से पूजा करने वाला भक्त सुख-समृद्धि, उन्नति और परम पद प्राप्त करता है.


मां कूष्मांडा की पूजा में विशेष रूप से पीले रंग का केसर वाला पेठा चढ़ाना शुभ माना जाता है. कुछ लोग इस अवसर पर सफेद पेठे के फल की भी चढ़ातें हैं.


माता को प्रसन्न करने के लिए पीले फूल, चूड़ियां, चुनरी और साड़ी चढ़ाई जाती है, क्योंकि पीला रंग मां कूष्माण्डा को प्रिय है.

 


 

 

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