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ओलचिकी लिपि में संताली भाषा में भारतीय संविधान का लोकार्पण,आदिवासी छात्रों में हर्ष

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 30 दिस॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

 आगस्टीन हेम्बरम

 दुमका ( DUMKA) :  दुमका संताल परगना महाविद्यालय के आदिवासी कल्याण महाविद्यालय छात्रावास संख्या–एक एवं चार के छात्रों ने भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा बीते 25 दिसंबर को ओलचिकी लिपि में संताली भाषा में भारतीय संविधान के लोकार्पण पर हर्ष व्यक्त किया है.छात्रों ने इसे संताल समाज एवं देश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक बताया तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महोदया के प्रति आभार प्रकट किया. छात्रों का कहना है कि,अब संताल समाज अपनी मातृभाषा संताली एवं मूल लिपि ओलचिकी में संविधान को पढ़कर उसके अनुच्छेदों, अधिकारों और कर्तव्यों को भली-भांति समझ सकेंगे. इससे संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी लाभ मिलेग.उल्लेखनीय है कि, संताली भाषा को 92वें संविधान संशोधन के माध्यम से 22 दिसंबर 2003 को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था. संताली भाषा को भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक माना जाता है. राष्ट्रपति द्वारा ओलचिकी लिपि में संताली भाषा में संविधान का लोकार्पण, संताली भाषा और समाज के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.यह पहल संताली भाषा और समाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती और सम्मान दिलाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी.इस अवसर पर छात्रों ने झारखंड के मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन से मांग की कि, राज्य में केजी से एमए तक की शिक्षा ओलचिकी संताली भाषा में शीघ्र प्रारंभ की जाए, ताकि संताल आदिवासी छात्र अपनी मातृभाषा ओलचिकी में शिक्षा प्राप्त कर सकें. इस अवसर पर छात्र नेता राजेंद्र मुर्मू, वर्तमान छात्रनायक रोहित मुर्मू,परेश मुर्मू, पूर्व छात्रनायक रितेश मुर्मू, पूर्व छात्रनायक सुरेश हेम्बरम, पिटर हेम्बरम,शिबू मुर्मू, विरेन्द्र किस्कू,अरूण सोरेन, संजय मुर्मू, लखिंदर मुर्मू,अमित मरांडी, रामकिंकर टुडू,अनुप हांसदा विश्वजीत मुर्मू, संजय बेसरा,अमन मराण्डी, महाराणा हेम्बरम, रायसेन बास्की,रूपलाल मुर्मू,इग्नासियुस मुर्मू, प्रवेश टुडू,अमर हांसदा, सुभाष चन्द्र मुर्मू,हरिकिशोर किस्कू, रामकृष्ण टुडू,सुबोध टुडू,सुनीराम मुर्मू आदि उपस्थित थे.

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