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सारंडा सेंचुरी के खिलाफ 16 नवम्बर को कोल्हान में आर्थिक नाकेबंदी, एक ढेला खनिज बाहर नहीं जाने देंगे आदिवासी संगठन

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 9 नव॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

न्यूज डेस्क

चाईबासा ( CHAIBASA) : 16 नवम्बर 2025 को आर्थिक नाकेबंदी रेल और सड़क को पूरी तरह ठप किया जाएगा. कोल्हान पोड़ाहाट और सारंडा से एक ढेला बाहर नहीं जाने दिया जाएगा. झारखंड में 5 वीं अनुसूचि को शक्ति से लागू करने की जरूरत है. अनुसूचित क्षेत्रों में जबरन आई.पी. सी. और सी. आर. पी. सी. के धाराओं को लागू किया जा रहा है. सारंडा को सेंचुरी घोषित करने या सुप्रीम कोर्ट को फैसला देने के पूर्व राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा प्रतिवेदन लिया जाना चाहिए. उसके उपरांत ही सारंडा मामले पर कोई निर्णय लिया जाना चाहिए. अनुसूचित क्षेत्र में राज्यपाल - राष्ट्रपति का क्रियाकलाप संदेह उत्पन्न करता है. 

राज्यपाल और राष्ट्रपति संविधान में निहित प्रावधान के अनुसार कार्य नहीं करने के कारण अनुसूचित क्षेत्रों में आई.पी. सी. और सी. आर. पी. सी. के तहत् धाराओं का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. यह बातें आज सारंडा के छोटा नगाड़ा स्थित जमकुंडिया (रडुवा) नया बाजार में आयोजित प्रतिनिधियों की सभा को संबोधित करते हुए झारखंड आंदोलनकारी बुधराम लागुरी ने कही. श्री लागुरी ने कहा कि भारतीय संविधान के 5 वीं अनुसूचि के भाग 10, अनुच्छेद 244 (A) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है. इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में रहने वाली जनजातियों के कल्याण और हितों की रक्षा करना है, जिसमें राज्यपाल को विशेष शक्तियां और जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. लेकिन सारंडा वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासियों के हितों को राज्यपाल और राष्ट्रपति से बिना रिपोर्ट लिए एक षड्यंत्र रच कर सारंडा को सेंचुरी घोषित करने की जल्दबाजी हो रही है. इसलिए अब जनजातीय सलाहकार परिषद् (TAC)द्वारा अनुसूचित जनजातियों के कल्याण से संबंधित विषयों पर राज्यपाल को सलाह देने की जरूरत है. उसके उपरांत ही सारंडा को सेंचुरी घोषित करना है या नहीं निर्णय लिया जाना चाहिए. 

इस सभा में उपस्थित लोगों ने सारंडा, कोल्हान पोड़ाहाट में जल, जंगल जमीन को बचाने के लिए एक संगठन का स्थापना किया गया जिसका नाम " कोल्हान - पोड़ाहाट, सारंडा बचाओ समिति " का गठन किया गया. इस दौरान संघ के पदाधिकारियों का भी सर्वसहमति से चयन किया गया जिसमें अध्यक्ष लागोड़ा देवगम, उपाध्यक्ष अमर सिंह सिद्धू, बिरसा मुंडा, बामिया माझी और महासचिव बुधराम लागुरी , सचिव कुसु देवगम का चयन किया गया है. बाकी पदाधिकारियों का चयन अगले बैठक में किया जाएगा. सभा को मानकी लागोड़ा देवगम, तुराम बिरुली, विश्वनाथ बाड़ा, मोo तबारक खान, माईकल तिरिया, मंगल सिंह सुरेन, बामिया माझी, बिरसा मुंडा, कृष्णा समद, प्रदीप महतो, चोकरो केराई, गोपाल कोड़ा, बरगी मुंडा, सुरेश अंगारिया, लखन बन्डिग, सजन जातरमा, ओड़िया देवगम, विश्वपाल कांडुलना, सिंगा सुरीन मुंडा, कुसु देवगम, रामो सिद्धू समेत काफी संख्या में आदिवासी मूलवासी मौजूद थे.

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