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भगवान राम को नकारा, भारत पर तीखा हमला , और सत्ता गंवाया, ओली का दर्द , समझिए खबर से  

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 11 सित॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

 

उपेंद्र गुप्ता


रांची ( RANCHI) : नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को नेपाल के जेन – जी के हिंसक प्रदर्शनों के कारण सत्ता से बेदखल होना पड़ा है. सेना की मदद से किसी तरह जान बचाकर भागे, इस समय सेना की सुरक्षा में ही रह रहे हैं, लेकिन अपनी विचारधारा के अनुसार भारत के खिलाफ जहर उगलना नहीं छोड़ा है. सत्ता गंवाने के लिए वे भारत जिम्मेवार मान रहे हैं. उनका साफ कहना है कि अगर वे भारत से समझौता कर लेते तो उनकी सत्ता बनी रहती. ओली का पूरा कार्यकाल भारत विरोधी का रहा है. ओली ने सेना के बैरक से अपने पार्टी के महासचिव को एक पत्र लिखा है जिसमें कहा है कि भारत पर तीखा हमला करने के कारण उन्होंने अपनी सत्ता गंवाई है. ओली ने कहा है कि संवेदनशील मुद्दों पर भारत को चुनौती देने की हिम्मत मैंने दिखाई है यह सब उसी का नतीजा है.   

अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थली को नकारा

पूर्व पीएम ओली कभी भी भगवान के राम के जन्मस्थली अयोध्या को नहीं माना. उनका मानना था कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में नहीं, बल्कि नेपाल के वीरगंज के थोरी नामक स्थान पर हुआ था, ओली का कहना था कि राम भारतीय नहीं नेपाली थे.भारत ने अयोध्या को नकली जन्मस्थली बनाया. जिसको लेकर उस समय काफी विवाद भी बढ़ा था. इतना ही नहीं पूर्व पीएम ओली ने कोविड के दौरान यह कह कर और भी सनसनी फैला दी कि नेपाल में कोरोना भारत की देन है. भारत से आने वाले लोग नेपाल में कोरोना फैला रहे हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि भारतीय वायरस चीनी या इतालवी वायरस से ज्यादा खतरनाक है. पूर्व पीएम ओली ने सत्यमेव जयते को सिंहम जयते कह कर विवाद बढ़ाया था.  

नेपाल का नया नक्शा बना कर भारत से बढ़ाया विवाद

केपी शर्मा ओली ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे कदम उठाए जो भारत के लिए चिंता का विषय बन गए. सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कदम था नेपाल का नया नक्शा, जिसमें भारतीय क्षेत्र कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था. भारत ने इस पर कड़ा विरोध जताया था, लेकिन ओली सरकार ने इसे अपनी संसद से पास करा लिया था. यह एक ऐसा कदम था जिसने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया था. इसके अलावा ओली ने कई बार भारतीय नेतृत्व पर कटाक्ष किया और भारत पर नेपाल के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया. उन्होंने जानबूझकर भारत विरोधी भावनाएं भड़काकर अपनी घरेलू राजनीति चमकाने की कोशिश की.


ओली का चीनी प्रेम के कारण बना भारत विरोधी छवि

पीएम ओली नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी के बड़े नेता थे. इसलिए उनकी विचारधारा भारत की अपेक्षा चीन से ज्यादा प्रभावित थी, इसका फायदा भारत के खिलाफ उठाने में चीन ने कोई कसर नहीं छोड़ा. ओली चीन के प्यादे के रूप में भारत के खिलाफ हमेशा बयानबाजी करते रहे, जिसका खामियाजा उन्हें सत्ता गंवा करना पड़ा है. उनका कार्यकाल भारत विरोधी नीतियों के लिए जाना जाता था. उन्होंने अक्सर सार्वजनिक मंचों से भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की और चीन के साथ नजदीकी बढ़ाई. उनके शासनकाल में भारत-नेपाल संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. वे कभी भारत के दौरे पर नहीं आएं.

 

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