
कैबिनेट में पारित पेसा कानून 24 घंटे बाद भी सार्वजनिक नहीं, क्या छुपा रही है सरकार ? भाजपा को क्यों है संदेह, जानिए खबर में
24 दिस. 2025
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न्यूज डेस्क
रांची ( RANCHI) : भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष आरती कुजूर ने हेमंत सरकार ने कल कैबिनेट में पेसा कानून की स्वीकृति दी है तो फिर आखिर 24 घंटे बीत जाने के बाद भी निर्णय को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया है? आखिर निर्णय में कौन सी ऐसी बात है जिसे हेमंत सरकार छुपाना चाहती है. मीडिया में छपवाई गई खबर पर आखिर जनता और आदिवासी समाज कैसे विश्वास करे. सच्चाई तो यही है कि मीडिया के लोगों को भी निर्णय से संबंधित संलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. उन्होंने कैबिनेट के निर्णय को सार्वजनिक करने की मांग की है.

न्यायालय के सख्त आदेश और भाजपा के आंदोलन ने हेमंत सरकार को किया बाध्य
भाजपा नेत्री आरती कुजूर ने झामुमो प्रवक्ता के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट आदिवासी समाज का अधिकार है, कोई क्रिसमस गिफ्ट नहीं. क्योंकि क्रिसमस शुरू होने के पहले भी आदिवासी समाज का अस्तित्व था. एक सरकार के लिए 6 साल का कार्यकाल कम नहीं होता. कब तक कोरोना का रोना रोते रहेंगे. सच्चाई तो यही है कि न्यायालय के सख्त आदेश और भाजपा के आंदोलन ने हेमंत सरकार को कैबिनेट में प्रस्ताव लाने केलिए बाध्य किया है.
भाजपा नेत्री ने कहा कि आदिवासी समाज के हित में भाजपा ने कितने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं यह जनजाति समाज जानता है. झामुमो ने भले छल और धोखे से राज्य की सत्ता हासिल कर ली है, इसका मतलब यह नहीं कि आदिवासी समाज हेमंत सरकार में मिल रही पीड़ा, प्रताड़ना को भूल जाएगा.
बाबूलाल ने स्वागत करते हुए जताया संदेह
कैबिनेट से पेसा नियमावली पारित होने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्वागत करते हुए कहा था कि अगर इसमें संविधान की 5वीं अनुसूची से जुड़ी भावना के विपरीत थोड़े भी परिवर्तन किए गए होंगे, तो पार्टी इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी. मरांडी ने यह भी कहा कि पार्टी राज्यपाल से भी इस संदर्भ में ध्यान आकृष्ट कराएगी, ताकि कानून बनाने के पहले यह पारंपरिक रूढ़ि व्यवस्था का आधार सुनिश्चित हो.











