
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर क्यों होनी चाहिए कानूनी कार्रवाई ? भाजपा नेत्री राफिया नाज ने कैसे घेरा मंत्री को, पढ़िए खबर में
22 दिस. 2025
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न्यूज डेस्क
रांची ( RANCHI) : भाजपा की युवा नेत्री राफिया नाज ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर जबरदस्त निशाना साधा है. राफिया ने कहा है कि मंत्री अपने बयान से न केवल जनता को भ्रमित कर रहे हैं, बल्कि संविधान, सेवा नियमों और कानून की मूल भावना पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं. वे अपने पद की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं.
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 13(1)(a) के अंतर्गत पद का दुरुपयोग
भाजपा प्रवक्ता राफिया नाज़ ने कहा कि संविधान के अनुसार प्रत्येक मंत्री संविधान एवं गोपनीयता की शपथ लेता है, इसके बावजूद स्वास्थ्य मंत्री द्वारा बार-बार यह दावा करना कि वे ₹3 लाख प्रतिमाह वेतन पर नौकरी दिला सकते हैं या मनचाही पोस्टिंग करा सकते हैं, संवैधानिक व्यवस्था और सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून में यह प्रावधान नहीं है कि कोई मंत्री सीधे नौकरी दे सकें या पैसे अथवा प्रभाव के आधार पर नियुक्ति करा सकें. उन्होंने कहा कि यदि कोई मंत्री इस प्रकार संविधान और सेवा नियमों का उल्लंघन करता है, तो वह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 13(1)(a) के अंतर्गत पद के दुरुपयोग का दोषी माना जाता है तथा धारा 13(2) के तहत उसे चार से दस वर्ष तक की जेल और जुर्माने की सज़ा हो सकती है, जो मंत्री, विधायक और अधिकारियों सभी पर समान रूप से लागू होती है.
दोहरा रवैया अपनाते हैं स्वास्थ्य मंत्री
राफिया नाज़ ने कहा कि एक ओर मंत्री मुस्लिम आयुष डॉक्टर को नौकरी देने की बात करते हैं और दूसरी ओर मुस्लिम बेटी के योग करने को अंग-प्रदर्शन बताया जाता है. यह दोहरा रवैया न केवल सामाजिक सौहार्द के लिए ख़तरनाक है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को रील, बयान और खोखले वादों की नहीं, बल्कि एक जवाबदेह, संवेदनशील और मज़बूत स्वास्थ्य व्यवस्था की आवश्यकता है.
रील और बयानबाज़ी में अधिक व्यस्त हैं स्वास्थ्य मंत्री
राफिया नाज़ ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री रील और बयानबाज़ी में अधिक व्यस्त हैं, जबकि ज़मीन ी हकीकत यह है कि आज झारखंड में एंबुलेंस जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा तक आम जनता को उपलब्ध नहीं हो पा रही है. उन्होंने कहा कि चाईबासा में चार माह की बच्ची की मौत केवल इसलिए हो गई, क्योंकि समय पर एंबुलेंस नहीं मिली, लेकिन इसके बावजूद मंत्री बच्चे की उम्र को लेकर बहस करते रहे.उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि बच्चा चार दिन का हो, चार महीने का या चार साल का, ऐसी संवेदनहीन बयानबाज़ी शर्मनाक है.
ज़मीनी सच्चाई से कट चुकी है वर्तमान सरकार
बजट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य का कुल स्वास्थ्य बजट लगभग ₹7,427.50 करोड़ है और इसके अतिरिक्त ₹729 करोड़ का सप्लीमेंट्री बजट भी है, इसके बावजूद उनके आकलन के अनुसार ज़मीनी स्तर पर दस प्रतिशत से अधिक राशि का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ज़मीनी सच्चाई से कट चुकी है और मानवीय संवेदनाओं से दूर होती जा रही है. राफिया नाज़ ने कहा कि झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्थिति अत्यंत भयावह है. लोग इलाज के लिए अपनी सीमित जेब से खर्च करने को मजबूर हैं, मुख्यमंत्री ग्राम बस योजना ज़मीनी स्तर पर कहीं दिखाई नहीं देती, आदिवासी व्यक्ति अपनी गर्भवती पत्नी को कंधे पर उठाकर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकने को मजबूर हैं और गुमला, सिमडेगा, चाईबासा, रांची सहित कई जिलों में समय पर एंबुलेंस न मिलने से लोगों की मौतें हो रही हैं. कई स्थानों पर ऑपरेशन थिएटर में टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन किए जाने और समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने से बच्चों और मरीजों की जान जाने की घटनाएँ सामने आई हैं.











