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28 नवबंर को कोर्ट में पेश होंगे सीएम हेमंत सोरेन ? राज्य सरकार के अनुरोध को हाईकोर्ट ने क्यों ठुकराया ? जानिए खबर में   

  • लेखक की तस्वीर: Upendra Gupta
    Upendra Gupta
  • 26 नव॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

न्यूज डेस्क

रांची ( RANCHI) :  झारखंड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन मामले में MP/MLA कोर्ट से मिली व्यक्तिगत उपस्थिति की छूट रद्द हो गई है.झारखंड हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 28 नवंबर को हर हाल में MP/MLA कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा. झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी मामले में निचली अदालत (MP/MLA कोर्ट) के समक्ष निजी रूप से पेश होने के आदेश पर लगी अपनी रोक हटा दी है. ईडी ने जमीन घोटाला मामले में सीएम पर 10 में से 8 समन अनदेखा करने की शिकायत की थी. हाईकोर्ट के इस फैसले से उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं. क्योंकि हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री को अब खुद कोर्ट में उपस्थित होना होगा.

दरअसल, यह पूरा मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी के समन से संबंधित है. पिछली सुनवाई में 4 दिसंबर 2024 को निचली अदालत (MP/MLA कोर्ट) ने सीएम को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी थी, जिससे उन्हें अदालत में हाजिर होने की अनिवार्यता नहीं थी. लेकिन हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका लगा है. 

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की मांग ठुकराई

मामले से जुड़े एक अधिवक्ता ने बताया कि मंगलवार को मामले की सुनवाई जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की बेंच में हुई. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अंतरिम राहत बढ़ाने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने इसे स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया. अदालत ने 4 दिसंबर 2024 को जारी अंतरिम आदेश को रद्द करते हुए रांची की एमपी-एमएलए कोर्ट को मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया. निचली अदालत इस मामले में पहले ही 28 नवंबर की तारीख तय कर चुकी है.

कैसे शुरू हुआ मामला?

मामले से जुड़े एक अधिवक्ता ने बताया कि ED ने फरवरी 2023 में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में शिकायत दायर की थी, जिसमें आठ बार जारी समन का पालन न करने का आरोप था. 4 मार्च को सीजेएम कृष्ण कांत मिश्रा ने आईपीसी की धारा 174 के तहत मामले में संज्ञान लिया और इसे सुनवाई के लिए एमपी-एमएलए कोर्ट में भेज दिया. इसके बाद मुख्यमंत्री सोरेन ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की, जिसे 5 जुलाई को खारिज कर दिया गया. इस आदेश को चुनौती देते हुए, मुख्यमंत्री ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत में लंबित मामले को खारिज करने की मांग की थी. हाई कोर्ट ने तब निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी और मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी थी. अब, हाई कोर्ट ने वह अंतरिम राहत रद्द कर दी है.

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